इन यात्री संघों में सबसे आगे द्वारिकाधीश पैदल यात्री संघ चल रहा था। जब यह संघ नेशनल हाइवे पर नौरंगदेसर के पास पहुंचा, तो एक अप्रत्याशित घटना घटी। प्रशासन ने संघ के साथ चल रहे डीजे को रुकवा दिया। बताया जाता है कि नापासर थाना पुलिस ने डीजे को वापस लौटाने के लिए कहा, जिसके बाद यात्रियों में रोष फैल गया।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन के इस निर्णय का विरोध करते हुए अपने कदम वहीं रोक दिए। उनके चेहरे पर निराशा और असंतोष स्पष्ट झलक रहा था। कुछ ही देर में श्रीडूंगरगढ़ से गए अन्य संघ भी वहां पहुंचने वाले थे, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो सकती थी।
इस घटना के संबंध में नापासर थानाधिकारी लक्ष्मण सुथार ने बताया कि सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उच्चाधिकारियों द्वारा डीजे बंद करवाने और वापस लौटाने के निर्देश दिए गए हैं। उनके अनुसार, डीजे पर तेज आवाज में नाचने के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए, जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक ने यात्रियों की सड़क सुरक्षा के लिए यह आदेश जारी किया है।
हालांकि, संघ में शामिल युवाओं ने प्रशासन के इस निर्णय का विरोध किया है और धरने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि डीजे उनकी यात्रा का एक अभिन्न अंग है, और इसे बंद करने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है।
अब देखना यह है कि प्रशासन और यात्री संघों के बीच इस मुद्दे पर सहमति कैसे बनती है। यह घटना आस्था और सुरक्षा के बीच एक जटिल सवाल खड़ा करती है, जिस पर विचार करना आवश्यक है। यह भी सोचने वाली बात है कि क्या सड़क सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं के बीच कोई सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है?