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पढें बीकानेर से दो खास खबरें एकसाथ:-

रवि पुगलिया पिछले चौबीस वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने 2002 में ‘देश और व्यापार’ समाचार पत्र से इस क्षेत्र में कदम रखा। यह समाचार पत्र प्रवासी राजस्थानियों में काफ़ी लोकप्रिय है। ‘देश और व्यापार’ का प्रकाशन कोलकाता और बीकानेर से होता है। इस समाचार पत्र की स्थापना 1979 में वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पुगलिया ने कोलकाता में की थी। इसने उद्योग जगत की आवाज़ को बुलंद करने के साथ-साथ समाज निर्माण और मानवीय मूल्यों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्तमान में, यह समाचार पत्र प्रधान संपादक प्रकाश पुगलिया के मार्गदर्शन और रवि पुगलिया के नेतृत्व में लाखों पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

18 वर्ष की आयु से ही पत्रकारिता और समाजसेवा को समर्पित रवि पुगलिया ने सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा दिया है। वे सिद्धगुरु श्री सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि गुरुदेव के अनुयायी हैं और ‘श्री ब्रह्मऋषि आश्रम, तिरुपति’ के नेशनल मीडिया प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत हैं। वे 2 अक्टूबर को एतिहाद एयरवेज की उड़ान से मित्रों और परिवार के साथ जयपुर से दुबई के लिए रवाना होंगे। रवि पुगलिया को यह विश्व स्तरीय सम्मान मिलने की खबर से बीकानेर के समाजसेवा, पत्रकारिता और सार्वजनिक क्षेत्र के लोगों ने खुशी जताई है।

उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान का भंडार हैं और ये हमारे विचारों को विकसित करने, रचनात्मकता को बढ़ावा देने और भावनात्मक रूप से परिपक्व होने में मदद करती हैं। व्यास ने अकादमी पुस्तकालय में उपलब्ध राजस्थानी पुस्तकों का लाभ उठाने के लिए शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकाधिक विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेजों में राजस्थानी विषय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

कार्यक्रम के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि सांस्कृतिक सृजन पखवाड़े के तहत अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। उन्होंने पुस्तक ‘राजस्थान के कवि’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें राजस्थानी के ग्यारह प्रतिष्ठित कवियों को शामिल किया गया है, जिनकी रचनाएँ युवा लेखकों को प्रेरित करती रहेंगी।

अकादमी सचिव शरद केवलिया ने बताया कि पुस्तक-प्रदर्शनी में अकादमी की पत्रिका ‘जागती जोत’ के 1973 से अब तक के अंक और अकादमी प्रकाशनों को प्रदर्शित किया गया है। पोथी-चर्चा में डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने कहा कि ‘राजस्थान के कवि’ पुस्तक विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में राजस्थानी विषय के पाठ्यक्रम में शामिल है। लेखिका सीमा पारीक ने कहा कि इन कवियों की कविताओं में लोक संस्कृति, प्रेम और प्रकृति का अद्भुत चित्रण है। कार्यक्रम का संचालन नगेन्द्र नारायण किराडू ने किया। इससे पहले, विधायक जेठानन्द व्यास ने पुस्तक-प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और साहित्यकार सुधा आचार्य ने शंखनाद किया। इस अवसर पर कई साहित्यकार, विद्यार्थी और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

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