श्रीडूंगरगढ़, 6 दिसंबर 2025। नवंबर की सर्द हवाओं में श्रीडूंगरगढ़ थाने में एक गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई। मामला एक नाबालिग युवती के लापता होने का था, और आरोप पड़ोस में रहने वाले एक युवक पर लगा था, जिसके साथ उसके भाग जाने की आशंका जताई गई थी।
थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद, जांच का जिम्मा हेडकांस्टेबल देवाराम को सौंपा गया। देवाराम ने कांस्टेबल रविन्द्र और अपनी टीम के साथ मिलकर मामले की छानबीन शुरू कर दी। उन्होंने मुखबिरों से जानकारी जुटाई, साइबर साक्ष्यों को खंगाला, और हर उस रास्ते पर चले जो उन्हें युवती तक पहुंचा सकता था।
पंद्रह दिनों की अथक मेहनत के बाद, पुलिस टीम को सफलता मिली। पता चला कि युवती और युवक हैदराबाद में हैं, जो श्रीडूंगरगढ़ से लगभग 1700 किलोमीटर दूर है।
देवाराम और उनकी टीम ने बिना देर किए हैदराबाद का रुख किया। हलवाल इलाके में उन्होंने डेरा डाला और युवती को ढूंढ निकाला। उसे सुरक्षित श्रीडूंगरगढ़ लाया गया।
शुक्रवार की शाम, युवती को नारी निकेतन भेज दिया गया। अब मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिसके बाद ही मामले में आगे की कार्यवाही की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, युवती को घर से भगाने में युवक की बहन भी शामिल थी। यह भी पता चला है कि हैदराबाद में युवक का जीजा मजदूरी करता है, जिसके पास वे दोनों पिछले 10 दिनों से रुके हुए थे।
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रेम की परिभाषा क्या है? क्या पलायन हमेशा समाधान होता है? और एक नाबालिग के जीवन में परिवार और समाज की क्या भूमिका है? ये सवाल शायद हमें सोचने पर मजबूर करें।