गुरुवार की सुबह, पूर्ण गणवेश में सजे स्वयंसेवकों का अनुशासित समूह, एक लयबद्ध गति से गांव के मुख्य मार्गों पर आगे बढ़ा। कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों के बीच, संघ का घोष एक प्रेरणादायक संगीत की तरह गूंज रहा था। ग्रामवासियों ने इस दृश्य का स्वागत खुले दिल से किया। उन्होंने पवित्र भगवा ध्वज पर पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया, मानों यह स्वागत राष्ट्र के प्रति समर्पण और सम्मान की अभिव्यक्ति हो।
पथ-संचलन के बाद, विजयदशमी उत्सव एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य बौद्धिक वक्ता, नोखा जिला संघचालक सुरेन्द्र सिंह ने अपने विचारों से श्रोताओं को प्रेरित किया। उन्होंने संघ की शताब्दी वर्ष यात्रा, स्थापना के उद्देश्यों, वर्तमान विस्तार, ‘पंच प्रण’ और आने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने संघ के कार्यों को समाज के हर पहलू से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि एक सशक्त और संगठित राष्ट्र का निर्माण किया जा सके।
संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी दी है कि विजयदशमी उत्सव का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। शुक्रवार, 10 अक्टूबर को गुसाईंसर बड़ा, उदरासर, धनेरू मंडल और श्रीडूंगरगढ़ नगर की मोमासर बास बस्ती में भी विजयदशमी उत्सव एवं पथ-संचलन का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन निश्चित रूप से समाज में एकता, अनुशासन और देशभक्ति की भावना को और भी मजबूत करेगा।