श्रीडूंगरगढ़ के पास, ग्राम पंचायत बेनीसर के गांव भोजास में एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। रेवंतसिंह राजपुरोहित नाम के एक व्यक्ति का देहांत हो गया। उनके पुत्रों – तोलसिंह, राजूसिंह और श्रवणसिंह ने अपने पिता को अनूठी श्रद्धांजलि दी। मृत्यु के 12वें दिन, उन्होंने पूरे गांव में फलदार और छायादार पौधों का वितरण किया।
तीनों भाइयों ने 501 ग्रामीणों को आम, अमरूद, पपीता, सीताफल, फालसा, आंवला, कटहल, तुलसी, अंजीर और ईमली के पौधे बांटे। उनका उद्देश्य केवल पौधे देना नहीं था, बल्कि हर ग्रामीण को उस पौधे को पालने की प्रेरणा देना भी था। उन्होंने सबसे आग्रह किया कि वे इन पौधों को अपने परिवार का हिस्सा मानें और उनका पालन-पोषण करें।
इसके साथ ही, परिवार ने श्मशान भूमि में बरगद और पीपल जैसे छायादार पौधे लगाए। उन्होंने इन पौधों की देखभाल करने का संकल्प लिया, ताकि ये पेड़ आने वाली पीढ़ियों को छाया दे सकें।
पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे सांवतसर के कैलाश विश्नोई ने इस परिवार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि गांव के बुजुर्गों ने भी इस पहल को खूब सराहा है।
यह घटना दिखाती है कि कैसे लोग अब पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं और इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बना रहे हैं। यह एक छोटा सा कदम है, लेकिन यह एक बड़ी उम्मीद जगाता है। यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम सब भी अपने जीवन में ऐसे बदलाव ला सकते हैं, जो प्रकृति के लिए हितकारी हों?