गोवर्धन पूजा के दिन, जब गांव के लोग ‘रामा-श्यामा’ के लिए कुएं-चौपाल पर एकत्रित हुए, तो एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। यह स्थान, जो सदियों से गांव के संवाद का केंद्र रहा है, इस बार एक नए बदलाव का साक्षी बना।
बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि गांव में मृत्युभोज की प्रथा को बंद किया जाएगा। यह एक ऐसा निर्णय है जो न केवल अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देगा। ग्रामीणों का मानना है कि मृत्युभोज बंद होने से गरीब परिवारों को राहत मिलेगी और वे अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने पर ध्यान दे पाएंगे।
इसके साथ ही, विवाह और अन्य समारोहों में डीजे के प्रयोग पर भी पूर्णतया प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। डीजे के कारण होने वाले शोर और विवादों से गांव के लोग लंबे समय से परेशान थे। इस फैसले से अब गांव में शांति और सौहार्द का माहौल बनने की उम्मीद है।
इस मौके पर पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। हरिराम गोदारा, फुसनाथ सिद्ध, आदुनाथ सिद्ध और अखाराम गोदारा जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भी इस पहल का समर्थन किया। अध्यापक ओमनाथ सिद्ध, व्याख्याता बालाराम मेघवाल और ओमाराम गोदारा जैसे बुद्धिजीवियों ने भी इस निर्णय को सराहा।
लगभग हर परिवार के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुए और गांव के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया। यह एक सराहनीय पहल है जो दिखाती है कि कैसे एक छोटा सा गांव भी बड़े बदलाव ला सकता है, अगर लोग मिलकर प्रयास करें। ऊपनी गांव ने यह साबित कर दिया है कि सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास से समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।