बैठक का मुख्य आकर्षण रहा सहकारी सदस्यता अभियान। इस अभियान के अंतर्गत 20 नई ग्राम सेवा सहकारी समितियों के गठन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। सहकारी समितियों के उप रजिस्ट्रार कैलाश चंद्र सैनी ने इस अवसर पर बताया कि जिले में अभी भी 61 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन नहीं हो पाया है। आज की बैठक में 20 ग्राम पंचायतों में समितियों के गठन को हरी झंडी मिल गई है, और शेष 41 ग्राम पंचायतों में भी जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इस कदम से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिलेगा। ग्राम सेवा सहकारी समितियां किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को ऋण, विपणन और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बैठक में केंद्रीय सहकारी बैंकों को सुदृढ़ करने पर भी ज़ोर दिया गया। केंद्रीय सहकारी बैंक के एमडी मोहम्मद फारूख ने बताया कि जिले में कुल 12 केंद्रीय सहकारी बैंक हैं, जिनमें से केवल 4 के पास अपनी इमारतें हैं। इस कमी को दूर करने के लिए श्रीडूंगरगढ़, बज्जू और पूगल में बैंकों के लिए सरकारी भवनों के आवंटन पर चर्चा हुई। यह भी तय हुआ कि लूणकरणसर में कृषि उपज मंडी में बैंक के लिए चिन्हित भूमि को जल्द ही बैंक को आवंटित कर दिया जाएगा।
इन प्रयासों से केंद्रीय सहकारी बैंकों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और वे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होंगे।
कुल मिलाकर, यह बैठक सहकारिता के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार करने वाली साबित हुई। जिला प्रशासन और सहकारी विभाग के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।