शिक्षा जगत में आज एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिली, जब मध्यावधि अवकाश के दौरान गैर सरकारी स्कूलों के संचालन को लेकर दो आला अधिकारियों की राय अलग-अलग सामने आई। एक ओर जहाँ एक अधिकारी ने इस विषय पर चेतावनी जारी की, वहीं दूसरी ओर दूसरे अधिकारी ने संचालन की अनुमति देते हुए संशोधित आदेश जारी कर दिया।
आज सुबह ही श्रीडूंगरगढ़ के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसमें निजी शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट रूप से शिविरा पंचांग (शैक्षिक कैलेंडर) का पालन करते हुए अवकाश रखने के निर्देश दिए गए थे। ऐसा लगा कि सभी निजी विद्यालय इन निर्देशों का पालन करेंगे।
लेकिन, कुछ ही देर बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एक बड़ी खबर आई। कार्यालय ने एक संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि निजी विद्यालय अभिभावकों की सहमति से पाँच दिनों के प्रकाश पर्व (दीपावली) को छोड़कर, परीक्षा की तैयारी और पुनरावृत्ति (दोहराव) कार्य के लिए विद्यालय का संचालन कर सकते हैं।
इस संशोधित आदेश ने मध्यावधि अवकाश के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह अवकाश केवल नाम का ही है?
सूत्रों की मानें तो आज जिले भर में कई निजी विद्यालय खुले रहे, जिनकी शिकायतें शिक्षा विभाग को भी मिली हैं। अब ऐसे में, एक ही दिन में आए ये दो अलग-अलग आदेश चर्चा का विषय बन गए हैं। लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर किस आदेश को सही माना जाए और इस स्थिति में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए क्या उचित है। यह घटना शिक्षा विभाग के भीतर समन्वय और स्पष्टता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।