श्रीडूंगरगढ़ ONE 25 जनवरी 2026। अंचल में आज दुलचासर व उदरासर मंडल और मोमासर बास व बिग्गाबास बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन संत सान्निध्य में संपन्न हुए। संतो ने एकजुट रहने व मुख्य वक्ताओं ने समाज में जाति पांति का भेदभाव नहीं बरत कर सम्मान पूर्वक रूप से रहने का आह्वान किया।
दुलचासर गांव में आयोजित हुआ हिन्दू धर्म सम्मेलन, निकली धर्म यात्रा व वातावरण हुआ धर्ममय।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। गांव दुलचासर में जैयमलदासजी महाराज के मंदिर प्रांगण में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन रविवार को हुआ। विशाल जनसमूह सम्मेलन में शामिल हुआ और मंच पर संतो का सान्निध्य रहा। सम्मेलन में अखिल भारतीय रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य धाम जैयमलदासजी महाराज दुलचासर के महंत त्रिलोकदास महाराज ने सनातन को शाश्वत बताते हुए धर्म व्याख्या की, उन्होंने कहा कि सनातन धर्म यानि हिंदू धर्म वह है जो एक अनादि, शाश्वत और एक नित्य व्यवस्था है। जिसका न कोई प्रारंभ है, और न अंत है। यह वेदों, उपनिषदों और शाश्वत़ सत्यों पर आधारित जीवन जीने की एक कला है। जो धर्म, कर्म, मोक्ष और आत्मा की अमरता पर जोर देती है और यह परा-प्रकृति के नियमों द्वारा़ संचालित है। उन्होंने कहा कि धर्म सृष्टि के आरंभ से ही विद्यमान है, इसलिए यह अनादि धर्म अर्थात इसका कोई संस्थापक या आरंभिक तिथि नहीं है। सनातन’ का अर्थ है जो सदा रहे, नित्य रहे, अर्थात समय के साथ न बदलने वाला शाश्वत सत्य हिन्दू धर्म ही है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म वेदों, पुराणों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है और इसे वैदिक धर्म भी कहते है। संत माधवदास महाराज ने हिन्दू धर्म सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि हिन्दू धर्म में अद्वैत, द्वैत, भक्ति मार्ग जैसे विभिन्न दार्शनिक विचारों को स्थान है। ये धर्म सत्य और कर्तव्य, कर्म फल और मोक्ष (जन्म-मृत्यु से मुक्ति) इसके प्रमुख सिद्धांत है। ये एक लचीली और समावेशी संस्कृति है, जो विविधता को स्वीकार करती है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरा विश्व एक परिवार है) में विश्वास करती है। मंच से मुरलीधर भाई, देवनाथ महाराज, सुरजाराम महाराज, संतोषानंद महाराज, योगी सेवानाथ महाराज, श्रीधाम वृंदावन के चैतन्य कृष्ण दास, मधू ब्रजवासी श्रीधाम वृंदावन ने भी हिन्दू धर्म के बारे में जानकारी दी। इससे पहले भारत माता के तेल चित्र आगे दीप प्रज्वलित कर हिन्दू धर्म सम्मेलन की शुरुआत की गई। सम्मेलन से पहले टेऊ गांव के ठाकुरजी महाराज के मंदिर से धर्म यात्रा निकाली गई। जो टेऊ मुख्य चौपाल, सूडसर बाजार, सूडसर कुंआ मुख्य चौपाल, बाबा रामदेव मंदिर, वीर तेजाजी गोशाला, वीर तेजाजी महाराज मंदिर से देराजसर करणी गोशाला, देराजसर गांव की मुख्य चौपाल, गोपालसर बस स्टैंड, खारिया कुंआ चौपाल, राजपूत धर्मशाला, नायकान मोहल्ला, विश्वकर्मा महाराज मंदिर, मीठिया कुंआ चौपाल, सत्यनारायण महाराज मंदिर से हिन्दू धर्म सम्मेलन स्थल पर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु व ग्रामीण मौजूद रहे। इसके चलते गांवों में धर्ममय वातावरण हो गया। हिन्दू धर्म सम्मेलन पहुंचे सभी संतों व महात्माओं का शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
उदरासर में हिंदू सम्मेलन का आयोजन संपन्न।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। क्षेत्र के उदरासर मंडल में रविवार को हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध रामायण कथा वाचक पूज्य पंडित किशोरचंद्र रामायणी का सान्निध्य रहा। महाराज ने भारतीय व पाश्चात्य संस्कृति पर व्याख्यान देते हुए सनातन को शांति, सहअस्तित्व, सौहार्द व सहयोग की संस्कृति बताया। महाराज ने कहा कि आज वेदना व तनाव से ग्रस्त पाश्चात्यय लोग भारतीय संस्कृति अपना रहे हैं और मथुरा वृन्दावन में शांति की तलाश में शरण ले रहे हैं। सम्मेलन में मुख्य वक्ता दौलतराम सुथार ने विचार व्यक्त करते हुए सामूहिक परिवारों को समाज के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि एक ही संतान हुई तो सारे रिश्ते समाप्त हो जाएंगे। बच्चे अपने मामा, चाचा, काका, बाबा किसको कहेंगे। उन्होंने संपत्ति के लिए पारिवारिक विवादों को समझदारी से सुलझाने की प्रेरणा दी। इस दौरान गांव के अनेक प्रबुद्धजन शामिल रहें।
मोमासरबास बस्ती व बिग्गाबास बस्ती में डॉ करणीप्रताप ने दी धर्म सेवा में समय देने का आह्वान किया।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। मोमासरबास बस्ती में करणी भवन व बिग्गाबास के पेड़िवाल नोहरा में हिंदू सम्मेलनों के आयोजन हुए। दोनों कार्यक्रम प्रसिद्ध करणी कथा वाचक डॉ करणीप्रताप के सान्निध्य में संपन्न हुए। करणीप्रताप ने युवाओं को धर्म की सेवा के लिए समय देने का आह्वान किया। उन्होंने हिंदू धर्म में महिलाओं के गौरवपूर्ण स्थान का सम्मान करने की प्रेरणा दी। कथावाचक ने हिंदू धर्म के लिए बलिदान देने वाले वीर महापुरूषों को याद करते हुए सनातन को वसुधैव कुटुम्बकम की व्यवस्था बताया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता वरिष्ठ स्वयंसेवक महेंद्र कच्छावा ने हिंदू धर्म की विशेषताएं बताते हुए इसे श्रेष्ठ जीवन यापन की संस्कृति बताया। कच्छावा ने कहा कि हिंदू धर्म एकमात्र धर्म है जो दूसरों के साथ समन्व्य, सम्मान व सहअस्तित्व के भाव से जीवन जीने की प्रेरणा दी। भजन गायक किन्नू बन्ना भी सम्मेलन में शामिल रहें व बड़ी संख्या में बस्ती की महिलाएं, युवा व लोग उपस्थति रहें।