यह घटना नारायण विहार थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, प्रवीण 27 अक्टूबर की रात खाना खाने के बाद अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने गए थे। रात लगभग 10:30 बजे वे घर लौटे और अपने एक दूर के रिश्तेदार प्रहलाद से करीब 20 मिनट तक फोन पर बात की। इसके बाद वे अपने कमरे में सोने चले गए। अगली सुबह जब परिवार वालों ने दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा तोड़ने पर प्रवीण को रस्सी के फंदे से लटका पाया गया।
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर FSL टीम के साथ सबूत जुटाए। पुलिस जांच में पता चला है कि प्रवीण ने बाजार से नई रस्सी खरीदी थी। हालांकि, कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।
मृतक के भाई अशोक कुमावत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले कुछ महीनों से ग्राम पंचायत के सरपंच, उनके बेटे और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मिलकर प्रवीण पर पंचायत में किए गए कार्यों के अवैध भुगतान के लिए हस्ताक्षर करने का दबाव बना रहे थे।
परिवार का कहना है कि सरपंच ने जलभराव क्षेत्र में अवैध रूप से तालाब खुदवाया और मिट्टी डलवाने के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान करवाना चाहते थे, जबकि वास्तव में वहां बहुत कम काम हुआ था।
अशोक कुमावत ने बताया कि प्रवीण ने इस अवैध दबाव की शिकायत बीडीओ से भी की थी, लेकिन उन्होंने भी सरपंच का साथ दिया। इससे आहत होकर प्रवीण ने व्हाट्सएप के माध्यम से अपना इस्तीफा भेज दिया था। परिजनों ने यह भी बताया कि वे स्वयं बीडीओ से मिलकर स्थिति समझाने गए थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने सरपंच, उनके बेटे और खंड विकास अधिकारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। इस घटना ने ग्राम विकास अधिकारी की कार्यशैली और ग्रामीण विकास में भ्रष्टाचार के मुद्दों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।