मामला तब शुरू हुआ जब रेलवे ने दुलचासर-कोटासर रेलवे अंडरब्रिज के पास पत्थर डालकर कुछ रास्तों को बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम रेलवे ने रेल पटरियों की सुरक्षा के नाम पर ये कदम उठाया है, लेकिन इससे दुलचासर के कई गांवों के लोगों के खेतों तक पहुंचने के रास्ते बंद हो गए हैं।
रविवार को हुई आमसभा में ग्रामीणों ने एक स्वर में रेलवे और स्थानीय प्रशासन से रास्तों को फिर से खोलने और सभी कट्टाणी रास्तों पर अंडरब्रिज बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए एक विस्तृत रणनीति बनाने का निर्णय लिया। इसके तहत, वे सांसद, विधायक, रेलवे और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखेंगे।
ग्रामीणों ने सोमवार को उपखंड अधिकारी से मिलने का फैसला किया है। वे राज्य सरकार को भी इस समस्या से अवगत कराएंगे। साथ ही, उन्होंने सांसद और विधायक से मिलकर उन्हें स्थिति की जानकारी देने और जिला कलेक्टर व उत्तर-पश्चिम रेलवे के प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने का भी निर्णय लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बासी महियान, गोनाणा और कालछा रोही के खेतों तक पहुंचने के लिए वे लंबे समय से इन रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे। रास्तों के बंद हो जाने से उन्हें भारी परेशानी हो रही है।
आमसभा में दुलचासर प्रशासक प्रतिनिधि मोडाराम महिया, उप प्रशासक श्यामसुंदर ओझा, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि छैलूसिंह परिहार, पूर्व पंचायत समिति सदस्य पेमाराम नायक, किसान सभा के नेता सुखराम, हंसराज, मामराज महिया, मुखराम नायक, दुलाराम नायक, भाजपा नेता बाबूलाल जाजड़ा, भागीरथ ओझा, हरिसिंह, पहाड़सिंह, दिलीप सिंह परिहार, गोविन्द राम, गणेशाराम, मांगीलाल मेघवाल, बेगाराम, कालूराम, गुलराज, दानाराम, गोपाल और परमानाराम नायक समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।
इस बीच, पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया भी आमसभा में पहुंचे और ग्रामीणों को एकजुट होकर समस्या के समाधान के लिए संघर्ष करने की सलाह दी। उन्होंने रेलवे, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य जनप्रतिनिधियों से मिलकर समस्या का समाधान निकालने का सुझाव दिया।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की एकजुटता और उनकी सुनियोजित रणनीति इस समस्या का क्या समाधान निकालती है। क्या रेलवे और प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर ध्यान देंगे, या फिर ग्रामीणों को अपनी राह खुद बनानी होगी? यह आने वाला समय ही बताएगा।