किसानों के हालात पर चिंता जताते हुए कांग्रेसी नेता हरिराम बाना ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के किसानों का दुर्भाग्य है कि 2014 से दो व्यापारी, किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करके सत्ता में बने हुए हैं।
बाना ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने अपने उद्योगपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिससे किसानों की लागत चार गुना बढ़ गई है और खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है ताकि किसान अपनी जमीनें बेचने पर मजबूर हो जाएं और कंपनियों के मजदूर बन जाएं।
श्रीडूंगरगढ़ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किसानों में जन जागरण अभियान चलाने की घोषणा करते हुए बाना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मूंगफली, मोठ, ग्वार, बाजरा, मूंग, गेहूं आदि की लागत और इस वर्ष के भावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रति बीघा हर उपज पर घाटा हो रहा है। बाना ने सभी किसानों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने और अपनी जमीन और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर, श्रीडूंगरगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिनिधि राधेश्याम सिद्ध लिखमादेसर ने सरकार पर कंपनियों के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो भविष्य में किसान अपनी जमीनें कंपनियों को बेचने और उनके गुलाम बनने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
पूर्व प्रधान भागूराम सहू ने किसानों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। जिला कांग्रेस कमेटी सचिव सोहनलाल महिया ने गिरदावरी जांच के नाम पर समर्थन मूल्य पर खरीद में देरी करने का आरोप लगाया और जल्द से जल्द खरीद शुरू करने की मांग की।
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के रामेश्वरदास स्वामी जाखासर ने बाड़मेर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पहले किसानों को लोन दिया गया और फिर उनकी आय बंद कर दी गई, जिसके कारण 80 प्रतिशत से अधिक किसानों को अपनी जमीनें कंपनियों को बेचने पर मजबूर होना पड़ा। पूर्व पंचायत समिति सदस्य ने किसानों को क्षेत्र की रीढ़ बताते हुए उनसे इस संकट के समय में साथ देने की अपील की। यूथ कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष संतोष गोदारा ने बारानी किसानों की आवाज उठाते हुए ग्वार और मोठ की समर्थन मूल्य पर खरीद की आवश्यकता पर बल दिया।
कांफ्रेंस के बाद, कांग्रेस नेताओं ने हरिराम बाना के नेतृत्व में एसडीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को एक चेतावनी पत्र सौंपा, जिसमें 11 सूत्रीय मांगों को उठाते हुए किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने की मांग की गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर वे बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
कांग्रेस नेता हरिराम बाना ने “खेती बचाओ, किसानी बचाओ” जन जागरण अभियान के तहत क्षेत्र के किसानों से अपील की है कि वे किसानी को बचाने के लिए किसी भी आंदोलन में साथ दें। बाना ने कहा कि वे इस संबंध में संघर्ष करने वाले प्रत्येक नेता और संगठन का बिना किसी राजनीतिक, जाति या संगठन भेद के समर्थन करेंगे।
बाना ने बताया कि इस अभियान के तहत सरकार को एक 11 सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा गया है, जिसमें किसानों की संपूर्ण उपज को समर्थन मूल्य पर खरीदने, मूंगफली और मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीद तुरंत शुरू करने, सभी किसानों को सरकारी खरीद में शामिल करने के लिए खरीद लक्ष्य बढ़ाने, पंजीकरण से वंचित किसानों के लिए राजफैड पोर्टल फिर से शुरू करने, ग्वार और मोठ पर भी एमएसपी लागू करने, इस वर्ष कम उपज और कम भावों के कारण सभी किसानों के बिजली बिल माफ करने, खराबा वाले खेतों के किसानों को मुआवजा और बीमा क्लेम देने, पिछले वर्ष की समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंगफली को सरकार द्वारा बाजार में बेचने पर रोक लगाने, ट्यूबवेल वाले किसान द्वारा पड़ोसी खेत में काश्त करने पर उसकी मूंगफली को भी समर्थन मूल्य पर तौलवाने, बिजली बिल में नाम परिवर्तन न करा पाने वाले किसानों का पूर्ववर्ती बिल पर तौलवाने और यूरिया डीएपी की किल्लत को दूर कर सभी किसानों को रबी की फसल बुवाई के लिए जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराने की मांगें शामिल हैं। बाना ने कहा कि यदि इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो कांग्रेस द्वारा एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।