जानकारों की मानें तो, सरकार लगातार ऐसे कारणों को आगे रख रही है जिससे खरीद में देरी हो रही है। किसानों का कहना है कि 26 सितंबर को खरीद की घोषणा के बावजूद, सहकारिता मंत्री गौतम दक के निर्देशों के बाद भी अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पंजीयन शुरू नहीं किए गए। अंततः 18 अक्टूबर से पंजीयन शुरू हुए, लेकिन दीपावली अवकाश के कारण 30 अक्टूबर तक ही चले। खरीद 1 नवंबर से प्रस्तावित थी, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। नवंबर का आधा महीना बीत चुका है और सरकार ने अब तक खरीद के लिए दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किए हैं।
किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वे मजबूर होकर अपनी उपज को बाजार में बेचने को विवश हैं, जहां उन्हें प्रति क्विंटल दो से तीन हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के किसान नेता और युवा नेता लगातार विभिन्न स्तरों पर खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं और इस देरी पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।
खरीद में हो रही देरी से श्रीडूंगरगढ़ का बाजार भी मायूस है। यह क्षेत्र पूरी तरह से खेती पर निर्भर है, और मूंगफली का उत्पादन यहां के किसानों की मेहनत का प्रतीक है, जो क्षेत्र को आर्थिक मजबूती प्रदान करता है। अनुमान है कि यदि इस वर्ष काटे गए सभी टोकन की खरीद पूरी हो जाती है, तो लगभग साढ़े चार अरब रुपये का सरकारी भुगतान किसानों को किया जाएगा।
वर्तमान में, मूंगफली का समर्थन मूल्य 7263 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में किसानों को औसतन 5000 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मूंगफली के भाव में थोड़ी तेजी देखी जा रही है, और सरकारी खरीद न होने से निराश किसान भावों में सुधार की उम्मीद में मंडी की ओर देख रहे हैं।
भावों में भारी अंतर के कारण इस वर्ष सरकारी खरीद के लिए तुलवाई में पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने किसानों ने अपना पंजीयन करवाया है। माना जा रहा है कि यदि पंजीकृत किसानों की खरीद की जाती है, तो यह पिछले साल की तुलना में दोगुनी होगी।
पिछले वर्ष 2024 में श्रीडूंगरगढ़ में 9202 किसानों की मूंगफली खरीदी गई थी। श्रीडूंगरगढ़ केंद्रों में 9 लाख 54 हजार 237 बोरे मूंगफली की तुलवाई हुई थी, जिसका 2 अरब 27 करोड़ 7 लाख 677 हजार 484 रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा, 2000 टोकन लूणकरणसर और नापासर खरीद केंद्रों पर स्थानांतरित कर दिए गए थे, जिनका करोड़ों का भुगतान श्रीडूंगरगढ़ के किसानों को इस राशि से अलग मिला था।
इस वर्ष 2025 में अभी तक 18,712 किसानों के टोकन पंजीकृत हुए हैं। यदि इन सभी टोकन की खरीद होती है, तो अनुमानित राशि साढ़े चार अरब रुपये से अधिक होगी। किसानों की मेहनत से हो रहा मूंगफली उत्पादन श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र को आर्थिक मजबूती देगा और यह पैसा किसी न किसी रूप में बाजार में आएगा, जिससे लोगों की समृद्धि बढ़ेगी। अब देखना यह है कि किसानों को उनकी मेहनत का फल कब और कैसे मिलता है।