श्रीडूंगरगढ़, 1 दिसंबर 2025। राजस्थान की माटी में, जहाँ रिश्तों की डोर सम्मान और परंपरा से बंधी है, आज एक नई मिसाल कायम हुई। श्रीडूंगरगढ़ के छोटे से गांव रीड़ी में जाखड़ परिवार ने अपनी बेटी का हाथ सांवताराम सारण के पुत्र अशोक के हाथों में सौंपा, और इस मिलन को दहेज की रस्मों से परे, सादगी और स्नेह से सजाया।
रविवार को गांव रीड़ी में रामलाल जाखड़ के घर विवाह की शहनाई बजी। हर तरफ खुशी का माहौल था, लेकिन इस खुशी में एक खास बात थी – यह विवाह दहेज मुक्त था। जाखड़ परिवार ने अपनी बेटी को बिना किसी बोझ के विदा किया, और वर पक्ष ने भी इस फैसले का सम्मान करते हुए किसी भी तरह के दान-दहेज की मांग नहीं की।
गांव वालों ने इस पहल को खुले दिल से सराहा। बेटी की किस्मत को सराहते हुए, उन्होंने वर पक्ष की प्रशंसा की और उनका आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि यह विवाह न केवल दो परिवारों का मिलन है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है।
इस अवसर पर, चूरू सांसद राहुल कस्वां, बीकानेर देहात जिलाध्यक्ष बिशनाराम सिहाग, श्रीडूंगरगढ़ से युवा नेता हरिराम बाना, हेतराम जाखड़, लूणकरणसर से कांग्रेस नेता राजेंद्र मूंड सहित कई गणमान्य व्यक्ति वर-वधू को आशीर्वाद देने पहुंचे। इन सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम बताया।
यह विवाह एक अनुस्मारक है कि रिश्ते अनमोल होते हैं और उन्हें लेन-देन की तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए। रीड़ी गांव में हुआ यह दहेज मुक्त विवाह एक नई शुरुआत है, जो समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में रिश्तों को सम्मान और प्रेम से निभा रहे हैं, या उन्हें बस एक बोझ बना रहे हैं।