आज सुबह होते ही श्रीडूंगरगढ़ मंडी, श्रीडूंगरगढ़ ए, श्रीडूंगरगढ़ सी, जीएसएस जोधासर और जीएसएस लिखमादेसर, इन पाँचों केंद्रों पर ऑनलाइन टोकन प्रणाली मानो हवा हो गई। पलक झपकते ही टोकन फुल हो गए और बड़ी संख्या में किसान टोकन पाने से वंचित रह गए।
किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें तब और गहरी हो गईं जब उन्हें पता चला कि क्षेत्र का एक केंद्र, जीएसएस सांवतसर, ही ऐसा है जहाँ अभी टोकन उपलब्ध हैं। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान अभी तक टोकन से वंचित हैं, इसलिए विभाग को टोकन की संख्या बढ़ानी चाहिए।
श्रीडूंगरगढ़ सी केंद्र पर केवल मूंगफली की खरीद होनी है, जबकि शेष पाँचों केंद्रों पर मूंग और मूंगफली दोनों की खरीद होगी। किसान टोकन पंजीयन में घोटाले का आरोप लगा रहे हैं और मूंग के टोकन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में मूंग और मूंगफली की पैदावार अच्छी हुई है, लेकिन टोकन ऊँट के मुँह में जीरे के समान जारी किए गए हैं।
किसानों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। पहले दो दिन साइट नहीं चलने से वे परेशान थे, फिर दो दिन दीपावली की छुट्टी आ गई, और आज टोकन फुल हो गए। किसानों ने विभाग से टोकनधारी किसानों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सहकारिता विभाग के अधिकारी भिखासिंह ने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ के लिए कितने टोकन आवंटित हुए हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि विभाग की रिपोर्ट के आधार पर 25 प्रतिशत खरीद के टोकन जारी होते हैं।
छतरगढ़ में गिरदावरी घोटाले की चर्चा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, और श्रीडूंगरगढ़ अंचल में भी गिरदावरी में आ रही गड़बड़ियों से किसान खासे परेशान हैं। किसान प्रशासन से गिरदावरी सही करने की मांग कर रहे हैं।
गांव माणकरासर के किसान मानाराम जाट के सभी वारिसान के 1/8 हिस्सा खेत है। जिसमें किसान ने खसरा नंबर 121 में मूंगफली की फसल बिजान की हुई है और इसमें गिरदावरी में मोठ बताया गया है। किसान जब समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए गिरदावरी निकलवाने गया तो हैरान रह गया।
श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव साधासर में 100 से अधिक किसान परेशान हैं। साधासर के पूर्व सरपंच रामकिशन तर्ड ने प्रशासनिक कार्मिकों पर आरोप लगाते हुए किसानों पर अत्याचार करने की बात कही है। तर्ड ने बताया कि गांव साधासर में 100 से अधिक किसानों के खेतों में मूंगफली खड़ी है और गिरदावरी में मोठ, मूंग व ग्वार बता दिया गया है, जिससे इनमें से एक भी किसान को टोकन नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि गिरदावरी कमरों में बैठकर मनमर्जी से भर दी गई और किसानों को उनके हक से वंचित कर दिया गया है। तर्ड ने बताया कि कई बार उपखंड अधिकारी व तहसीलदार को गिरदावरी और मौके की फोटो प्रति भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन एक भी गिरदावरी नहीं सुधारी गई है।
यह स्थिति किसानों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, और प्रशासन को इस मामले में तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित फल मिल सके।