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कल बनेगी रसोई, परसों लगेगा भोग, बाजार में तैयार मिल रहा पंचकुटा व कई प्रकार के आटे, पढें पूरी खबर

श्रीडूंगरगढ़ ONE 9 मार्च 2026। 11 मार्च, बुधवार को क्षेत्र के हर घर में शीतला अष्टमी का पूजन किया जाएगा। छोटे बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु के की प्रार्थना के साथ हर घर में मंगलवार को शीतला भोग के लिए विशेष प्रकार की पारंपरिक रसोई बनाई जाएगी।
आज सोमवार को बाजार में पंचकुटे की सब्जी की सामग्री खूब बिक रही है। राजा बाजार में परचून के दुकानदार राजू झंवर ने बताया कि सांगरी सहित पंचकुटे की सब्जी की सामग्री, मोठ व बाजरी का आटा तैयार मिल रहा है। जिससे शीतला पूजन का भोग बनाया जाएगा। बाजार में खरीददार पहुंच रहें है और शीतला पूजन की तैयारी के सामानों की खरीद की जा रही है।
विदित रहें लोक परंपराओं के अनुसार होली के बाद आने वाले चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। पर्व से एक दिन पहले यानी 10 मार्च को ‘रांधा-पुआ’ की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें घरों में माता के भोग के लिए भोजन पहले ही बनाकर रख लिया जाता है। शीतला अष्टमी का पर्व माता शीतला की पूजा को समर्पित है। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले बना ठंडा भोजन माता को अर्पित किया जाता है। कई जगहों पर इस पर्व को बसौड़ा या बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है।
अष्टमी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
o 11 मार्च रात 1:54 बजे से अष्टमी तिथि शुरू
o 12 मार्च सुबह 4:19 बजे अष्टमी तिथि समाप्त
o सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
o श्रद्धालु माता शीतला की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगे

शीतला अष्टमी पर ठंडा भोजन चढ़ाने की परंपरा
श्रीडूंगरगढ़ ONE। शीतला अष्टमी पर माता को ठंडा या एक दिन पहले बना भोजन चढ़ाने की परंपरा है। धार्मिक कथा के अनुसार एक बार गर्म भोजन से माता शीतला का मुख जल गया था। तब एक वृद्ध महिला ने उन्हें ठंडा भोजन अर्पित किया, जिससे माता प्रसन्न हुईं। उसी समय से इस दिन ठंडा या बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा शुरू मानी जाती है।
पर्व के पीछे बताया जाता है वैज्ञानिक कारण
श्रीडूंगरगढ़ ONE। शीतला अष्टमी को मौसम परिवर्तन के समय मनाया जाता है। यह दिन ठंड के बाद गर्मी की शुरुआत का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन के बाद बासी भोजन से बचने और ताजा भोजन करने की सलाह दी जाती थी, ताकि बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके।

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