कहते हैं, जीवन एक क्षणभंगुर डोर है, और मन्नीराम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दोपहर के शांत समय में, वह अचानक करंट की चपेट में आ गए। बिजली का झटका इतना तीव्र था कि मन्नीराम बुरी तरह से झुलस गए।
ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत श्रीडूंगरगढ़ के उपजिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन दुर्भाग्यवश, चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद मन्नीराम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। एक हंसता-खेलता युवक, जो कल तक अपने सपनों को साकार करने में लगा था, आज एक ठंडी लाश बन गया।
इस हृदयविदारक घटना की सूचना मिलते ही एएसआई राजकुमार मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अपनी कार्यवाही कर रही है, वहीं मन्नीराम के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
शनिवार की शाम तक, परिवार ने मन्नीराम के शव को नहीं लिया था। रविवार की सुबह, सरपंच प्रतिनिधि हेतराम जाखड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्र हो रहे हैं। सबकी आंखें नम हैं और मन में एक ही सवाल है – क्यों?
यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है। एक पल में सब कुछ बदल सकता है। मन्नीराम की असामयिक मृत्यु ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। हर कोई स्तब्ध है और इस दुखद घटना पर विश्वास करने को तैयार नहीं है।
मन्नीराम की कहानी एक चेतावनी भी है। यह हमें याद दिलाती है कि हमें हर पल सतर्क रहना चाहिए और जीवन की अनमोलता को समझना चाहिए।