बैठक का मुख्य विषय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंगफली खरीद में कथित अनियमितताएँ थीं। किसानों ने विशेष रूप से गिरदावरी रिपोर्टों में हुई गड़बड़ियों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
किसानों का आरोप है कि कई इलाकों में पटवारियों द्वारा गिरदावरी में गलत फसल दर्ज की गई, जिसके चलते वास्तविक किसानों को भारी नुकसान हुआ। उनका कहना है कि मनमाने ढंग से की गई काट-छांट से टोकन प्राप्त करने में भी बाधा आई। किसान संघ ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही दोषी पटवारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी अपेक्षा की है।
किसान संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले दस दिनों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है और वंचित किसानों को नए टोकन जारी नहीं किए जाते हैं, साथ ही टोकन सूची सार्वजनिक नहीं की जाती है, तो वे धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।
बैठक के बाद, किसान संघ का एक प्रतिनिधिमंडल उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) श्रीडूंगरगढ़ को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने पहुंचा।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष शंभूसिंह राठौड़, तहसील अध्यक्ष बजरंग सिंह, जिला कार्यकारिणी सदस्य धन्नेसिंह, श्रवणसिंह पुंदलसर, बलवंत सेन, महेंद्रसिंह, गजेंद्रसिंह, अरुण दर्जी और सुंदरलाल सहित कई किसान उपस्थित थे, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। यह घटना किसानों के बीच व्याप्त असंतोष को उजागर करती है और प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले पर कितनी गंभीरता से ध्यान देता है और किसानों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।