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आचार्य तुलसी का 112वां जन्मदिवस अणुव्रत दिवस के रूप में मनाया गया

साध्वी संगीतश्री और डॉ. साध्वी परमप्रभा के सान्निध्य में हुआ भावपूर्ण आयोजन

डूंगरगढ़ one 23 अक्टूबर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। तेरापंथ धर्मसंघ के नवम अनुशास्ता आचार्य तुलसी के 112वें जन्मदिवस को गुरुवार को अणुव्रत दिवस के रूप में श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। यह आयोजन श्रीडूंगरगढ़ सेवाकेंद्र मालू भवन में सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी संगीतश्री और डॉ. साध्वी परमप्रभा के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञानशाला के बालक युवराज चौपड़ा द्वारा मंगलाचरण से हुई। इसके पश्चात साध्वी संपतप्रभा और साध्वी शांतिप्रभा ने अपने विचार रखकर उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्य तुलसी के प्रेरक जीवन से अवगत कराया।

इस अवसर पर श्री जैन तेरापंथी सभा के मंत्री प्रदीप पुगलिया, तेरापंथ महिला मंडल की उपाध्यक्ष मधु झाबक, तेयुप अध्यक्ष विक्रम मालू तथा अणुव्रत समिति के मंत्री एडवोकेट रणवीर खीची ने आचार्य तुलसी को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया। तेरापंथ महिला मंडल द्वारा सामूहिक गीतिका का संगान किया गया।

कार्यक्रम में गौरव दुगड़, सुशील डागा, शान्तिलाल झाबक और विवेक पुगलिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने एक स्वर में कहा कि आचार्य तुलसी का जीवन त्याग, तप और मानवता के आदर्शों का प्रतीक था।

साध्वी संगीतश्री और डॉ. साध्वी परमप्रभा ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि “आचार्य तुलसी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने समाज में नशामुक्ति, नैतिकता और सदाचार की अलख जगाई। अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से उन्होंने मानवता को नई दिशा दी।”

उन्होंने कहा कि गुरु तुलसी का उद्देश्य केवल धर्म का प्रचार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और शांति का संदेश देना था। उन्होंने ज्ञानशालाओं की स्थापना कर भावी पीढ़ी में संस्कारों का बीजारोपण किया

कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ महिला मंडल की उपाध्यक्ष मधु झाबक ने किया। आयोजन में संघीय संस्थाओं के प्रतिनिधि, धर्मप्रेमी बंधु-बांधवों और स्थानीय श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति रही।

अंत में सभी ने गुरुदेव आचार्य तुलसी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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