25 अगस्त, 2025 की रात, श्रीडूंगरगढ़ में मानो वक़्त ठहर सा गया था। आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे और हवा में एक अजीब सी खामोशी थी। इस खामोशी को चीरती हुई, श्रीडूंगरगढ़ थाना पुलिस की एक टीम अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने निकली।
एएसआई राजकुमार के नेतृत्व में पुलिस दल हेमासर रोही में हाइवे के किनारे स्थित एक होटल के पास पहुँचा। यहाँ, रेलवे फाटक कॉलोनी के निवासी 32 वर्षीय शंकरलाल मेघवाल को खड़े हुए पाया गया। उसके पास 60 पव्वे अवैध देशी शराब थी।
पुलिस ने शंकरलाल को गिरफ्तार कर लिया और अवैध शराब को जब्त कर लिया। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया और जांच की जिम्मेदारी एएसआई ग्यारसीलाल को सौंप दी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या निकल कर आता है और इस अवैध कारोबार के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अवैध शराब का कारोबार किस तरह समाज में अपनी जड़ें जमा रहा है। पुलिस की इस कार्रवाई ने निश्चित रूप से इस दिशा में एक मजबूत संदेश दिया है, लेकिन यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारियाँ ही इस समस्या का समाधान हैं? क्या हमें समाज के ताने-बाने में कुछ ऐसे बदलाव लाने की ज़रूरत है, जिससे इस तरह के अवैध कारोबार को पनपने का मौका ही न मिले?