रेगिस्तान की सुनहरी रेत और ऐतिहासिक इमारतों के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान में, हाल ही में घटी कुछ घटनाओं ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जैसलमेर, जोधपुर और जयपुर में हुए हृदयविदारक हादसों ने राज्य सरकार को सड़क सुरक्षा के प्रति और अधिक सजग कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू हो गए हैं।
इसी सिलसिले में, श्रीडूंगरगढ़ में जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं को कम करना था।
जिला कलेक्टर वृष्णि ने पुलिस और परिवहन विभाग को सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों और मॉडिफाई गाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये वाहन न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि इनसे प्रदूषण भी बढ़ता है।
सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हाइवे और सड़कों पर बने अवैध कट भी हैं। कलेक्टर वृष्णि ने इन अवैध कटों को तत्काल बंद करने के आदेश दिए, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, जिन्हें ‘ब्लैक स्पॉट’ भी कहा जाता है, पर एक सप्ताह के भीतर सुरक्षा के इंतजाम करने के भी निर्देश दिए।
शहरी क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या एक आम बात है, जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती है। जिला कलेक्टर ने उन स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था करवाने के लिए कहा, जहाँ इसकी कमी है।
सड़कों पर बेसहारा पशु भी दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, कलेक्टर वृष्णि ने गायों के गले में रिफ्लेक्टर पट्टियां लगाने और निराश्रित पशुओं को गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था करने का प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल दुर्घटनाओं को कम किया जा सकेगा, बल्कि पशुओं को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस और परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर अपने विचार और सुझाव दिए। सभी ने मिलकर सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इन प्रयासों से राजस्थान की सड़कों पर कितना बदलाव आता है और क्या ये पहलें सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने में कारगर साबित होती हैं।