मुख्य प्रवचन में साध्वी संगीतश्री ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी समाज की सच्ची प्रगति तभी संभव है, जब उसके सदस्य आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ मिलजुल कर रहें। उन्होंने आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य महाश्रमण के उन प्रयासों को याद किया, जिनके द्वारा अणुव्रत के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया गया। साध्वी जी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज और राष्ट्र में सुधार लाने के लिए हर व्यक्ति को पहले स्वयं में सुधार लाना होगा।
तेरापंथी सभा से विजयराज सेठिया, महिला मंडल से मधु झाबक और तेयुप से चमन श्रीमाल ने अपने विचारों से सांप्रदायिक सौहार्द के महत्व को रेखांकित किया। सभी वक्ताओं ने उपस्थित जनसमूह को यह संकल्प दिलाया कि वे समाज के हर व्यक्ति का सम्मान करेंगे और प्रेम और सौहार्द का वातावरण बनाने में अपना योगदान देंगे।
सह प्रभारी विमल भाटी ने कहा कि सौहार्द की शुरुआत हमें अपने घर, समाज और गांव से करनी होगी। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता श्याम आर्य (धीरदेसर चोटियां) ने सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण के लिए नशामुक्त रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयम और नशामुक्ति ही समाज में सच्ची एकता का आधार बन सकते हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अल्ताफ रजा (इमाम हुसैन फिक्र-ए-मिल्लत) और कन्हैयालाल सारस्वत (कृषि अधिकारी) ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सांप्रदायिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया।
साध्वी संगीतश्री और साध्वी डॉ. परमप्रभा ने प्रेरक कहानियों और गीतों के माध्यम से सभी को एकता, सहयोग और प्रेम का संदेश दिया। कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों के हृदय में यह गहरा भाव जगाया कि समाज की उन्नति और शांति का आधार परस्पर सहयोग, सद्भाव और संयम में ही निहित है।
आये हुए अतिथियों का स्वागत दुपट्टा पहनाकर किया गया। अध्यक्ष सुमति पारख, मंत्री एडवोकेट रणवीर खीची, और उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन के.एल. जैन ने किया।
अणुव्रत समिति से शुभकरण पारीक, मुकेश स्वामी, अशोक झाबक और नगर की विभिन्न संस्थाओं एवं संघीय संगठनों के पदाधिकारी तथा गणमान्य नागरिक इस अवसर पर उपस्थित रहे। समिति की ओर से यह जानकारी दी गई कि 4 अक्टूबर को पर्यावरण दिवस और 5 अक्टूबर को नशामुक्ति दिवस मनाया जाएगा।