रेत के टीलों के बीच बसे श्रीडूंगरगढ़ से एक ऐसी खबर आई है जो दिल को झकझोर देती है। 18 नवंबर, 2025 को रीड़ी गांव की उत्तरादी रोही में किसान सुखराम जाट की ढाणी में अचानक आग लग गई। दोपहर के करीब 3 बजे उठी लपटों ने देखते ही देखते पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया।
सुखराम अपनी गर्भवती पत्नी के साथ खेत में काम कर रहे थे। उनके छह छोटे बच्चे ढाणी के आस-पास खेल रहे थे, जब यह भयानक हादसा हुआ। आग की लपटें उठती देख सुखराम और आस-पास के खेतों में काम कर रहे लोग तुरंत भागे और आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
आग में सुखराम के घर का सारा सामान जलकर राख हो गया। सूत्रों के अनुसार, घर में रखे 20 हजार रुपये नकद, सोने की टूस्सी, चांदी की तागड़ी और पायलें, गेहूं, राशन, कपड़े और ओढ़ने-बिछाने का सामान सब कुछ जल गया। सबसे दुखद बात यह है कि घर में होने वाले जापे की तैयारी के लिए प्रसूता के लिए लाया गया सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। एक परिवार की खुशियाँ पल भर में राख में बदल गईं।
इस मुश्किल घड़ी में रेखाराम कालवा और अन्य पड़ोसियों ने इंसानियत का परिचय दिया। गांव के सक्रिय युवक पुरनाथ सिद्ध ने तुरंत पुलिस और पटवारी को सूचना दी और पीड़ित परिवार की मदद की गुहार लगाई।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन कितना अनिश्चित है। एक पल में खुशियों से भरा घर दूसरे ही पल मातम में बदल सकता है। सुखराम और उनका परिवार आज बेघर हो गया है, उनकी गृहस्थी उजड़ गई है। ऐसे में समाज के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम आगे आएं और उनकी मदद करें, ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपने जीवन को नई शुरुआत दे सकें।