श्रीडूंगरगढ़, 6 दिसंबर 2025। श्रीडूंगरगढ़ के मोमासर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नगर इकाई ने शनिवार को महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया। यह आयोजन भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर किया गया, जिसे ABVP ने “सामाजिक समरसता दिवस” के रूप में मनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब अंबेडकर चौक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इस अवसर पर कृष्णा प्रजापत को बाबा साहेब का चित्र भेंट किया गया।
ABVP की खेलो भारत प्रांत सहसंयोजिका और बीकानेर विभाग छात्रा प्रमुख कृष्णा प्रजापत ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर शिक्षा को समाज का सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि यदि वे उनके विचारों को अपनाएं, तो एक समरस और सशक्त भारत का निर्माण अवश्य ही संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेल, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
राजकीय महाविद्यालय मोमासर की कॉलेज इकाई अध्यक्ष पलक भाटी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसी क्रम में, बिग्गा बास में भी डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बाबा साहेब के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस पर शनिवार शाम बिग्गा बास के बाबा रामदेव मंदिर में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के युवाओं ने बड़ी संख्या में इस सभा में भाग लिया और बाबा साहेब को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रकाश गांधी ने इस अवसर पर बाबा साहेब के संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पहले था।
इस मौके पर राजेंद्र स्वामी, राजाराम गोदारा (शहीद हेतराम गोदारा के भाई), जावेद बेहलीम, रवि बारूपाल, चांद रतन घोटिया, सुरेश बना, देवेंद्र कुमार, सोनू बारूपाल, विजय सिंह राजपुरोहित, मोनू बारूपाल, पवन बारूपाल, कमलेश पारीक, हुंताराम कालवा, बाबूलाल, अनीश बारूपाल, बिलों शायर और ओमप्रकाश सहित अनेक युवा उपस्थित थे। इन युवाओं की उपस्थिति दर्शाती है कि बाबा साहेब के विचार आज भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं और उन्हें सामाजिक समरसता और सशक्त भारत के निर्माण के लिए एकजुट होने का संदेश दे रहे हैं।