लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। घड़ी की सुई 9 पर क्या आई, सिस्टम ही हांफने लगा। बताया जा रहा है कि राजफेड की ऑनलाइन टोकन वेबसाइट शुरू होते ही बंद हो गई। यह तकनीकी अड़चन किसानों के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी।
“सरकारी व्यवस्था का मज़ाक बना दिया है,” किसानों की निराशा शब्दों में साफ़ झलक रही थी। श्रीडूंगरगढ़ ही नहीं, बल्कि नोखा, लूणकरणसर, खाजूवाला और बीकानेर के किसान भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं।
किसानों की इस परेशानी पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) नेता हनुमान बेनीवाल भी मुखर हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से व्यवस्था सुधार की मांग करते हुए कहा कि ऑनलाइन गिरदावरी में भी कई खामियां हैं, जिसके चलते किसान परेशान हो रहे हैं।
मोमासर के सैनी ई-मित्र केंद्र, तहसील वाली गली स्थित शहीद भगत सिंह ई-मित्र और घुमचक्कर के पास रिद्धि सिद्धि ई-मित्र जैसे केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ देखी गई। हर कोई टोकन निकलवाने की उम्मीद लिए बैठा था, लेकिन सिस्टम की बेरुखी ने उन्हें निराश कर दिया।
घुमचक्कर के निकट रिद्धि सिद्धि ई-मित्र के संचालक सहीराम ने बताया कि सुबह 9 बजे से एक भी टोकन नहीं निकला है और किसान हताश हो रहे हैं।
हालांकि, सहकारी समिति के अधिकारियों का कहना है कि अत्यधिक रश के कारण साइट सपोर्ट नहीं कर रही होगी, लेकिन उन्होंने किसानों को टोकन समय पर मिलने का आश्वासन दिया है।
किसानों को गिरदावरी टोकन के लिए अपना जनआधार कार्ड, आधार कार्ड और खसरा नंबर ई-मित्र केंद्र पर ले जाना होगा। सहीराम ने यह भी स्पष्ट किया कि ओटीपी जनआधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही भेजा जाएगा।
मोमासर के सैनी ई-मित्र पर बैठे किसान ओमप्रकाश ने बताया कि उनके खेत में मूंगफली है, लेकिन गिरदावरी में मोठ और ग्वार दर्शाया जा रहा है। कई अन्य किसानों ने भी इस तरह की तकनीकी समस्याएँ बताई हैं।
तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा ने कहा कि गिरदावरी में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि तकनीकी खामियों को ठीक कर किसानों को टोकन लेने में पूरा सहयोग किया जाएगा।
यह घटना किसानों के लिए एक सबक है, और सरकार के लिए एक चुनौती। देखना यह है कि सिस्टम की खामियों को दूर कर किसानों को राहत कब तक मिलती है।