WhatsApp Menu
18 मार्च 2026 का पंचांग, साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।  |  श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र से न्यूज एक्सप्रेस में पढ़ें आज की कुछ खास खबरें एकसाथ  |  श्रीडूंगरगढ़ मंडी से देखें सभी जिंसो के “आज के भाव”  |  राधे कृष्णा महिला मंडल ने मनाया गणगौर उत्सव, संस्कृति जागरण का किया प्रयास।  |  भारतीय नववर्ष पर श्रीडूंगरगढ़ में निकलेगी भव्य प्रभात फेरी, तैयारियां प्रारंभ।  | 

सहू परिवार ने अपनाई जागरूकता, तीजादेवी के नेत्र अब दो अंधेरे जीवन में भरेंगे रोशनी

अंगदान को बढ़ावा देने के लिए सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठन लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में, श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में तेरापंथ युवक परिषद की कोशिशों से नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

इसी जागरूकता का परिणाम है कि अंचल के छोटे से गांव कुंतासर में एक ऐसा कार्य हुआ, जो पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन गया। यहां सहू परिवार ने गांव में पहली बार नेत्रदान जैसा पुण्य कार्य किया। सांवताराम सहू की धर्मपत्नी तीजादेवी के निधन के बाद, उनके परिवार ने यह संकल्प लिया कि उनकी आंखों से किसी अंधेरे जीवन में उजाला होगा।

परिवार ने तुरंत तेरापंथ युवक परिषद के अशोक झाबक से संपर्क किया। झाबक ने भी बिना देर किए सरदारशहर के नेत्रदान संग्रहण अस्पताल को सूचित किया। अस्पताल से डॉ. अंकित स्वामी के नेतृत्व में एक टीम सुबह ही कुंतासर गांव पहुंची और तीजादेवी की अंतिम इच्छा को पूरा किया।

इस भावुक क्षण में तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष विक्रम मालू, उपाध्यक्ष चमन श्रीमाल और संयोजक अशोक झाबक ने तीजादेवी के पुत्र पुरखाराम सहू, बहू किशनीदेवी, पौत्र जगदीश, मुखराम, अमरचंद, और जयकरण सहू का आभार व्यक्त किया। उन्हें परिषद की ओर से प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। इस अवसर पर तीजादेवी के पड़पौत्र दीपांशु, तेजस्व, नितिन, गगन, ध्रुव और मानव भी उपस्थित थे।

परिवार के सदस्यों के अलावा, गांव के कई प्रतिष्ठित लोग जैसे मालाराम, आशाराम, मेघाराम, मोहनराम, सुगनाराम, किशनाराम, आदुराम, मुन्नीराम, और रावताराम भी इस पुण्य कार्य के साक्षी बने। सभी ने सहू परिवार के इस निर्णय की सराहना की।

परिषद के सदस्यों ने बताया कि यह नेत्रदान न केवल कुंतासर गांव में पहला है, बल्कि अन्य समाज का भी पहला नेत्रदान है। गांव भर में तीजादेवी के जीवन भर के त्याग और सेवा भाव की चर्चा हो रही है, जो उनकी मृत्यु के बाद भी कायम है। वहीं, तेरापंथ समाज में भी अन्य समाज द्वारा नेत्रदान करवाए जाने पर परिषद सदस्यों के कार्य की सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि तीजादेवी की आंखें अब किसी और के जीवन में रोशनी बनकर हमेशा जीवित रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम layers मोबाइल नंबर mic ऑडियोज़ smart_display शॉर्ट्स theaters शोज़