WhatsApp Menu
सामाजिक अंकेक्षण संघ का स्नेह मिलन: अप्रैल से रिकॉर्ड जांच और भौतिक सत्यापन, 2022 का बकाया भुगतान जल्द  |  नेत्र चिकित्सालय को दानदाता सोमाणी ने दी लाखों की अति-आधुनिक मशीन, मिलेगा मरीजों को लाभ  |  श्रीडूंगरगढ़ में अजमत-ए-मुस्तफा जलसा, उमड़ी भीड़; उल जिलानी साहब बोले- अच्छे अखलाक और माता-पिता की सेवा ही असली इबादत  |  रैली में गूंजे महावीर के जयकारे, झांकियां सजाकर प्रस्तुत की नाटिकाए  |  राजस्थान बोर्ड ने जारी किया 12वीं का रिजल्ट, 90% से अधिक अंक हासिल करने वालों के फोटो होंगे प्रकाशित  | 

सर्व समाज द्वारा श्मशान भूमि हेतु भूमि आवंटन की मांग

यह मांग इलाके के लोगों की वर्षों से चली आ रही एक आवश्यकता को रेखांकित करती है। ज्ञापन में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि कस्बे के पश्चिम में स्थित कालू बास का मुक्ति धाम, बिग्गा बास से काफी दूर है। इस भौगोलिक दूरी के कारण, अंतिम संस्कार के लिए शव को वहां तक ले जाना एक कठिन प्रक्रिया बन जाती है, जिससे हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों को अत्यधिक परेशानी होती है।

यह समझना ज़रूरी है कि किसी भी समाज में, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण होती है, बल्कि यह भावनात्मक रूप से भी बहुत संवेदनशील होती है। ऐसे में, दूर स्थित श्मशान घाट तक शव को ले जाने में होने वाली असुविधा न केवल शारीरिक रूप से थका देने वाली होती है, बल्कि यह शोक संतप्त परिवारों के लिए भावनात्मक रूप से भी कष्टदायक होती है।

स्थानीय निवासियों ने बिग्गा बास क्षेत्र में श्मशान भूमि के लिए उपयुक्त ज़मीन आवंटित करने का आग्रह किया है, ताकि कस्बे के लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके। यह मांग न केवल एक सुविधा की मांग है, बल्कि यह एक सामाजिक न्याय की भी मांग है।

ज्ञापन सौंपने वाले लोगों में बिहारी लाल पटवारी, खयाली राम महावर, रवि कांत सैनी, हिम्मत नाथ, गोपाल सिखवाल, श्रीभगवान पुजारी, घनश्याम माली, भरत सिखवाल, विक्की सैनी, नंदलाल भार्गव, पिंटू मीना, बाबूलाल सैनी, रामा स्वामी और सर्व समाज के अन्य सदस्य शामिल थे। इन सभी की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि यह मांग केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की है।

अब देखना यह है कि नगरपालिका प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या कार्रवाई करती है। उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द ही उचित कदम उठाएगा, जिससे श्रीडूंगरगढ़ के निवासियों को राहत मिल सके। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से स्थानीय प्रशासन और समुदाय के बीच संवाद और सहयोग को और मजबूत करेगा, और उम्मीद है कि भविष्य में भी ऐसे जनकल्याण शिविरों का आयोजन होता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम layers मोबाइल नंबर mic ऑडियोज़ smart_display शॉर्ट्स theaters शोज़