यह हादसा तब हुआ, जब सुथार परिवार अपने मुखिया ठाकरमल सुथार की माताजी, लिछमा देवी को पुष्कर में स्नान कराने के लिए रवाना हुआ था। लिछमा देवी के पति का देहांत कुछ ही समय पहले हुआ था और परिवार इस यात्रा को शोक से उबरने के एक प्रयास के रूप में देख रहा था। उनके साथ गांव के ही हलवाई ओमसिंह राजपूत भी थे, जो गाड़ी चला रहे थे।
दुर्भाग्यवश, रास्ते में उनकी एसयूवी एक रोडवेज बस से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लिछमा देवी (70 वर्ष), ठाकरमल सुथार की पत्नी तुलछी देवी (42 वर्ष), और उनकी बहन शारदा देवी (50 वर्ष) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गाड़ी चला रहे ओमसिंह राजपूत भी इस हादसे में जान गंवा बैठे।
हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, लेकिन यह राहत की बात है कि तुलछी देवी के तीन बच्चे – आशीष, मुरली और ममता, और उनकी एक और बुआ जग्गुदेवी सुरक्षित हैं। उन्हें लाडनूं के अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
जैसे ही खबर गांव पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। लोग घटनास्थल और अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। बाद में, शवों को गांव लाया गया, जहां माहौल गमगीन हो गया। ठाकरमल सुथार इस हादसे से बुरी तरह टूट गए हैं और उन्हें सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
यह दुर्घटना एक और परिवार के लिए भी वज्रपात बनकर आई है। ओमसिंह राजपूत, जो मोमासर से केवल 7 किलोमीटर दूर रतनगढ़ तहसील के गांव बाढ़ा की ढाणी के निवासी थे, अपने पीछे दो छोटे बच्चों और बूढ़े माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनके दो बड़े भाई विदेश में रहते हैं, और ओमसिंह ही परिवार का सहारा थे। उनकी असामयिक मृत्यु से पूरे गांव में शोक का माहौल है। ओमसिंह हलवाई का काम करने के साथ-साथ खेती भी करते थे।
मृतक शारदा देवी, जो नोखा से अपने ससुराल से शुक्रवार की रात ही अपनी मां के साथ पुष्कर जाने के लिए आई थीं, अपने पीछे दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गई हैं। उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
ठाकरमल सुथार पांच बच्चों के पिता हैं, जिन्होंने एक ही झटके में अपनी मां और दादी दोनों को खो दिया है। घर में अब मातम छाया हुआ है और बच्चे अपनी मां के आंचल को तरस रहे हैं।