यह कार्यक्रम सिंधी कॉलोनी स्थित सिंधी पार्क में सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम की शुरुआत राजीव भाई दीक्षित को श्रद्धापूर्वक पुष्पांजलि अर्पित करके की जाएगी।
संगोष्ठी में उपस्थित वक्ता स्वदेशी जीवनशैली अपनाने, योग और आयुर्वेद को दैनिक जीवन में शामिल करने के फायदों के बारे में बताएंगे। उनका मानना है कि आज के दौर में, जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, योग और आयुर्वेद स्वस्थ जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए, कार्यक्रम में आयुर्वेदिक काढ़ा भी वितरित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार होगा, जिससे लोग स्वस्थ रह सकेंगे। इसके अतिरिक्त, योग प्रशिक्षक उपस्थित लोगों को योगासन भी करवाएंगे, जिससे वे योग के महत्व को समझ सकें और इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय युवाओं की एक टीम सक्रिय रूप से जुटी हुई है। योग शिक्षक किशन शर्मा, बलराम बेनीवाल, अन्नाराम सारण, माधव मित्तल और कालूराम मंडा सभी व्यवस्थाओं को संभालने में लगे हैं।
युवाओं का कहना है कि राजीव भाई दीक्षित की विचारधारा स्वदेशी, स्वास्थ्य और मानसिक गुलामी से मुक्ति के संदेश को आगे बढ़ाती है। उनका प्रसिद्ध कथन, “मैं भारत को भारतीयता की मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूं…” आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
कस्बे के विभिन्न छात्रावासों और संस्थाओं के लोग भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर स्वावलंबन और स्वदेशी के इस अभियान का हिस्सा बनें और राजीव भाई दीक्षित के विचारों को आगे बढ़ाने में योगदान दें। यह कार्यक्रम निश्चित रूप से लोगों को सोचने पर मजबूर करेगा कि कैसे हम अपने जीवन में स्वदेशी और स्वावलंबन को अपनाकर एक स्वस्थ और समृद्ध जीवन जी सकते हैं।