श्रीडूंगरगढ़, जो कि एक विशाल ग्रामीण क्षेत्र है, में पशुधन की बहुतायत है। ऊंट, गाय, भेड़, बकरी जैसे पशु यहां की पहचान हैं और अधिकांश समुदाय की आजीविका का आधार भी। ऐसे में पशुपालकों की चिंता वाजिब है कि वर्तमान पशु चिकित्सालय में संसाधनों, उपकरणों और कर्मचारियों की भारी कमी है। यह कमी पशुपालकों को समय पर उपचार और आपातकालीन सेवाओं से वंचित कर रही है।
यह क्षेत्र सीमावर्ती होने के कारण भी संवेदनशील है। पशुधन की सुरक्षा, रोगों पर नियंत्रण और आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाएं यहां हमेशा जरूरी रहती हैं। ऐसे में पशुपालकों का मानना है कि एक बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकता है।
इस मुद्दे पर ‘आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति’ के अध्यक्ष जतन सिंह का कहना है कि यदि प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय को बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाता है, तो ग्रामीण क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सेवा, टीकाकरण, रोग निदान, दवा वितरण और दुग्ध उत्पादन संवर्धन जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। उनका मानना है कि उन्नत सेवाएं मिलने से दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होगी, जो सीधे तौर पर पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को सुधारेगा।
इसी उम्मीद के साथ, सेवा समिति ने पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत से निवेदन किया है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, सीमावर्ती संवेदनशीलता और पशुधन की अधिकता को देखते हुए श्रीडूंगरगढ़ के इस प्रमुख पशु चिकित्सालय को जल्द ही बहुउद्देश्यीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाए।
इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए समिति अध्यक्ष जतन सिंह के साथ पूर्व अध्यक्ष मनोज डागा, राज कुमार प्रजापत, जय धरू, सत्यनारायण टाक, मदन सोनी, प्रवीण पालीवाल, भीकमचंद सुथार, मनोज कायल और साँवरमल प्रजापत भी उपस्थित थे। सबकी आँखों में एक ही सवाल है – क्या सरकार उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगी? क्या श्रीडूंगरगढ़ के पशुपालकों को जल्द ही उन्नत पशु चिकित्सा सेवाएं मिल पाएंगी? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर आने वाला समय ही देगा।