कस्बे के सरदारशहर रोड पर स्थित डॉ. बी.आर. अम्बेडकर स्मृति भवन में एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ, पूर्व जिला परिषद सदस्य सुभाष कमलिया, राजस्थान मेघवाल परिषद के जिला उपाध्यक्ष थानमल भाटी, सहीराम रोलन, प्रकाश गांधी, और मनोज मेघवाल जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
इसी भावना के साथ, पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने भी स्मृति भवन पहुंचकर बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अंबेडकर के विचारों को समाज में अपनाने से ही भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर किसान नेता गिरधारीलाल जाखड़, गौरव टाडा, और मुखराम नायक भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर बाबा साहब की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और जयकारे लगाए।
कस्बे के बिग्गाबास स्थित बाबा रामदेव मंदिर में भी एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने बाबा साहब के शिक्षा, समानता, और सामाजिक न्याय के संदेशों पर प्रकाश डाला। राजेंद्र स्वामी, राजाराम गोदारा, प्रकाश गांधी, जावेद बहलीम, और रवि बारूपाल जैसे युवाओं ने “बाबा साहब अमर रहें” के नारे लगाए, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की मोमासर इकाई ने भी बाबा साहब अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस को सामाजिक समरसता दिवस के रूप में मनाया। राजकीय महाविद्यालय में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जहाँ वक्ताओं ने अंबेडकर के विचारों को वर्तमान समाज के लिए प्रासंगिक बताया। इसके साथ ही, गांव के अम्बेडकर चौक पर स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। परिषद की विभाग छात्रा प्रमुख कृष्णा प्रजापत ने अपने संबोधन में कहा कि अंबेडकर की विचारधारा से ही समरस भारत का निर्माण संभव है।
मोमासर में भीम युवा शक्ति संगठन ने भी एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया। संगठन द्वारा अंबेडकर लाईब्रेरी में आयोजित इस कार्यक्रम में बीरबल मास्टर, हुलासाराम मेघवाल, भगवानाराम मेघवाल, और डूंगरराम मेघवाल जैसे वक्ताओं ने युवाओं को अंबेडकर के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। बाबूलाल गर्ग ने बताया कि इस आयोजन में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया।
इन सभी कार्यक्रमों में लोगों ने बाबा साहब के जीवन और उनके विचारों को याद किया और उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। यह दिन न केवल श्रद्धांजलि का दिन था, बल्कि समाज को एकजुट करने और समानता के मूल्यों को बढ़ावा देने का भी अवसर था।