यह बैठक न केवल छात्रावास के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि सामाजिक उत्थान के प्रति समर्पित भाव का भी प्रतीक था।
बैठक की शुरुआत में संस्था के मंत्री सुशील सेरडिया ने छात्रावास के भवन निर्माण कार्य की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने 3.34 करोड़ रुपए की आय-व्यय का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। सेरडिया जी ने जोर देते हुए कहा कि अब समिति का मुख्य लक्ष्य समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस पुनीत कार्य से जोड़ना है। इसके लिए 11-11 हजार रुपए की न्यूनतम राशि के साथ सदस्यता अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा गया।
बैठक में उस वक्त उत्साह का संचार हुआ जब भंवरलाल सारण जाखासर ने अपनी पूर्व घोषित सहयोग राशि समिति को भेंट की।
अध्यक्ष एडवोकेट श्यामसुंदर आर्य ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “आज हमारा समाज नशे की लत और कई कुप्रथाओं से जूझ रहा है। ये प्रवृत्तियां हमारे सामाजिक ढांचे को अंदर से कमजोर कर रही हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए विनाशकारी साबित हो सकती हैं। इसलिए, शिक्षा के साथ-साथ इन बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाना भी बेहद जरूरी है।”
बैठक में उपस्थित मुलाराम भादू, लक्ष्मणराम खिलेरी, पूनम नैण सहित कई सदस्यों ने अपने-अपने समाजहितकारी सुझाव दिए, जो भविष्य की योजनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इस अवसर पर पुरखाराम कुकणा, मास्टर प्रभुराम बाना, सरदाराराम बाना, लक्ष्मीनारायण भादु, कुम्भाराम घिंटाला, गोविन्दराम बाना, केशराराम कड़वासरा, धर्मपाल बांगड़वा, रेखाराम लुखा, भवानीशंकर जाखड़, दीनदयाल जाखड़, ओमप्रकाश कस्वां जैसे गणमान्य सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जो समाज के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है।
बैठक के अंत में छात्रावास अधीक्षक श्रवणकुमार भाम्भू ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह बैठक निश्चित रूप से महर्षि दयानंद छात्रावास विकास समिति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगी।