श्रीडूंगरगढ़, 25 अगस्त 2025। नियति ने रामदेवसिंह के जीवन में एक बार कठिन परीक्षा ली, पर उन्होंने हार नहीं मानी। विद्युत निगम के ऊपनी जीएसएस में तकनीशियन के पद पर कार्यरत रामदेवसिंह ने जर्मनी के ड्रेसडन शहर में आयोजित 25वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में न केवल भाग लिया, बल्कि अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए स्वर्ण पदक सहित कुल चार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
37 वर्षीय रामदेव ने 30 से 39 आयुवर्ग में भाला फेंक (ट्रैक एंड फील्ड इवेंट) में स्वर्ण पदक हासिल किया। उनकी असाधारण प्रतिभा यहीं नहीं रुकी, उन्होंने लंबी कूद में रजत पदक और बॉल थ्रो व डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक भी अपने नाम किए।
इस वैश्विक खेल आयोजन में विभिन्न देशों के लगभग 1600 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भारत से 57 खिलाड़ियों का दल गया था, जिसमें राजस्थान से नौ प्रतिभागी शामिल थे। झुंझुनूं से दो, जयपुर से तीन और जोधपुर से एक खिलाड़ी ने भी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भाग लिया।
रामदेव बताते हैं कि 2012 में उनकी मां ने उन्हें जीवनदान दिया था। गंभीर पेट की समस्या के चलते उनके गुर्दे खराब हो गए थे, जिसके बाद उन्हें किडनी प्रत्यारोपण करवाना पड़ा। स्वास्थ्य लाभ का सफर आसान नहीं था और उन्हें पूरी तरह ठीक होने में लगभग एक वर्ष का समय लगा।
खेलों के प्रति रामदेव का जुनून जगजाहिर है। वे पहले भी कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं और अनेक पदक जीत चुके हैं। उन्होंने श्रीडूंगरगढ़ में आठ वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं और वे मूल रूप से खूड़ के पास स्थित कंवरपुरा गांव के निवासी हैं।
उनकी इस शानदार उपलब्धि पर समाजसेवी जुगलकिशोर तावणियां, उनके मित्रों और ऊपनी कार्यालय के उनके सहयोगियों ने उन्हें बधाई दी है। रामदेवसिंह की कहानी साहस, दृढ़ संकल्प और जीवटता की प्रेरणादायक मिसाल है। यह दिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य अपनी इच्छाशक्ति के बल पर सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है।