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वंचित किसानों को दो राहत, किसानों ने जिला कलेक्टर से और युवा नेता ने मंत्री जांच व टोकन बढ़ाने की रखी मांग।

किसानों का कहना है कि गिरदावरी में गड़बड़ी के कारण वे सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य पर मूंगफली बेचने से वंचित रह गए हैं। उनकी मांग है कि वंचित किसानों को ऑफलाइन गिरदावरी की अनुमति दी जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।

इस बीच, जैसलसर, मणकरासर और पूनरासर जैसे क्षेत्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि खसरा नंबर रिकॉर्ड में मौका नक्शा और मौका अक्शा समान नहीं हैं। कहीं नेटवर्क की समस्या है, तो कहीं खसरा खुल ही नहीं रहा, जिससे तकनीकी कारणों से गिरदावरी में त्रुटियाँ हुई हैं।

जानकारों का कहना है कि करीब एक दशक पहले पूरे रिकॉर्ड को सही तरमीम के साथ अपडेट करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से यह कार्य आज भी अटका हुआ है। उनका सुझाव है कि सरकार को रिकॉर्ड सही करवाना चाहिए और जहां जिसका खसरा है, उसे वहीं स्थापित किया जाए।

किसानों की समस्याओं को लेकर माणकरासर रोही के कई किसानों ने जिला कलेक्टर से शिकायत की है और दोबारा गिरदावरी करवाने की मांग की है। युवा नेता डॉ. विवेक माचरा ने सहकारिता मंत्री गौतम दक से बात कर मूंगफली खरीद केंद्रों की क्षमता और संख्या बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने सरकार से गिरदावरी से वंचित किसानों की गिरदावरी करवाने और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को निलंबित कर सजा देने की भी मांग की है।

इस बीच, ऑफलाइन गिरदावरी की अनुमति की मांग भी जोर पकड़ रही है, क्योंकि पोर्टल लॉक होने के बाद दोबारा गिरदावरी की संभावना कम ही है।

हालांकि, प्रशासन किसानों को राज किसान गिरदावरी एप के माध्यम से स्वयं गिरदावरी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। शिविरों में किसानों को एप की जानकारी दी जा रही है और उसे डाउनलोड भी करवाया जा रहा है, लेकिन किसानों की जागरूकता और रुचि में कमी दिख रही है।

ऐसे में, सवाल यह उठता है कि क्या तकनीकी दक्षता और जमीनी हकीकत के बीच तालमेल बिठाकर किसानों को गिरदावरी की उलझन से मुक्ति दिलाई जा सकती है? क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने में सफल होंगे? इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में छिपे हैं, लेकिन इतना तय है कि श्रीडूंगरगढ़ के किसानों की निगाहें अब समाधान की ओर टिकी हुई हैं।

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