पीड़िता लिछमा पत्नी किशनाराम जाट ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि 23 अगस्त की दोपहर, जब उनके पति और बच्चे घर में सो रहे थे, वह अपनी गाय को देखने के लिए बाहर निकलीं। उन्होंने देखा कि गाँव के ही कालूराम पुत्र सीताराम और ओमप्रकाश पुत्र अन्नाराम जाट उनके घर में पट्टी का कातला रोप रहे थे। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो आरोप है कि आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज की, धक्का देकर गिरा दिया और मारपीट की।
शिकायत में आगे कहा गया है कि कालूराम ने उनके गले से सोने का सात फुलड़ों वाला हार तोड़कर अपनी जेब में डाल लिया। लिछमा के अनुसार, आरोपियों ने उनके साथ बदसलूकी भी की। उनकी चीख-पुकार सुनकर ओमप्रकाश के पिता अन्नाराम भी लाठी लेकर आ गए और उन्हें मारने लगे।
जब लिछमा के पति और बेटा बाहर आए, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया। आरोप है कि वे घर में घुस गए और पूरे परिवार के साथ लाठियों से मारपीट की, जिससे कई लोगों को चोटें आईं।
अपनी जान बचाने के लिए लिछमा रसोई की ओर भागीं, तो कालूराम ने रसोई में तोड़फोड़ की। उनका बेटा इस घटना का वीडियो बना रहा था, तो आरोपी उसे मारने के लिए दौड़े। उसने कमरे में घुसकर खुद को अंदर बंद कर लिया। लिछमा ने भी रसोई का दरवाजा बंद कर लिया, लेकिन आरोपियों ने बाखल में पड़ी ईंटों से दरवाजों पर हमला किया।
शोर सुनकर गांव वाले इकट्ठा हो गए, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गए। पीड़िता के पति ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच हैड कांस्टेबल बलवीरसिंह को सौंप दी है। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस घटना के पीछे की सच्चाई क्या है। यह घटना गाँव में चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई इंसाफ की उम्मीद कर रहा है।