यह कहानी है पारस जैन की, जो श्रीडूंगरगढ़ के निवासी हैं और वर्तमान में इंदौर में रहते हैं। इंदौर, जो अपनी स्वच्छता के लिए देश भर में जाना जाता है, आज पारस जैन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है। दरअसल, पारस ने एक ऐसे मुद्दे को उठाया, जिससे इंदौर शहर और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता था।
वर्ष 1984 में भोपाल में एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई थी, जिसे भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस त्रासदी में यूनियन कार्बाइड का बचा हुआ कचरा पीथमपुर की एक फैक्ट्री में जलाया गया था। इस कचरे की राख का क्या हुआ, यह प्रश्न कई लोगों के मन में था।
बताया जाता है कि इस राख को नष्ट करने के लिए पीथमपुर से मात्र 500 मीटर दूर एक बंकर जैसी यूनिट बनाई गई थी, और राज्य सरकार ने इसे वहीं नष्ट करने की योजना बनाई थी। लेकिन, “संस्था विश्वम” के संस्थापक पारस जैन ने समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने हाईकोर्ट मध्यप्रदेश में एक जनहित याचिका दायर की।
8 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने पारस जैन के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि राख को नष्ट करने के लिए बनाई गई यूनिट की सुरक्षा की क्या गारंटी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो राख है, उसमें मरकरी की मात्रा बहुत अधिक है, और यदि यह राख गलती से भी पानी, जमीन या फसलों में मिल जाती है, तो आने वाली पीढ़ियां कैंसर सहित कई घातक बीमारियों से जूझ सकती हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 20 नवंबर से पहले ऐसी जगह ढूंढी जाए जहां आबादी, वन और जल न हो, और वहीं इस राख को नष्ट किया जाए।
पारस जैन के इस कार्य के लिए इंदौर ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश और देश भर के जागरूक लोग उन्हें धन्यवाद दे रहे हैं। लोगों का मानना है कि पारस जैन जैसे युवाओं के कारण ही देश सुरक्षित है।