स्वयंसेवकों के कदम ताल, कंधों पर सजे दंड और दिलों में राष्ट्रभक्ति का अटूट विश्वास – यह दृश्य श्रीडूंगरगढ़ में आम हो गया है। रास्ते में पुष्प वर्षा और भारत माता के जयकारों से वातावरण गुंजायमान है।
शुक्रवार को गुंसाईसर बड़ा, उदरासर, धनेरू और मोमासर बास में पथ संचलन आयोजित किए गए। इन चारों आयोजनों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया। कार्यक्रमों की शुरुआत शस्त्र पूजन से हुई, जो भारतीय संस्कृति में शक्ति और शौर्य के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
मोमासर बास में बीकानेर विभाग संघचालक टेकचंद बरडिया, धनेरू में जोधपुर प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख शंभूसिंह, उदरासर में मोमासर सह खंड कार्यवाह दौलतराम और गुंसाईसर बड़ा में बीकानेर विभाग कार्यवाह प्रदीप कुमार ने बौद्धिककर्ता के रूप में संघ के क्रमिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने संघ के शुरुआती दिनों में आई चुनौतियों, संघर्षों और फिर समाज में इसकी बढ़ती स्वीकार्यता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने संघ के सेवा कार्यों और विचार परिवार के संगठनों के विकास यात्रा पर भी जानकारी दी।
धनेरू में कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेमदास स्वामी ने की। चारों स्थानों पर समाज के लोगों ने भारत माता के जयकारों और पुष्प वर्षा से संचलन का स्वागत किया। यह दृश्य समाज और संघ के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।
शनिवार को सुरजनसर, नौसरिया-मिंगसरिया और श्रीडूंगरगढ़ शहर के बिग्गाबास में पथ संचलन और शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों से क्षेत्र में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश और भी प्रबल होगा।