खेती-किसानी को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में यह किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। कभी सूखा, कभी ओलावृष्टि, तो कभी बेमौसम बरसात, संकटों का यह सिलसिला किसानों का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा। दिन-रात हाड़तोड़ मेहनत करने वाले किसान अब भगवान से भी सवाल करने लगे हैं, “आख़िर हम कब तक परीक्षा देंगे?”
रविवार रात से शुरू हुआ बरसात का दौर मंगलवार तक जारी रहा। सातलेरा, बिग्गा, मूंडसर, उदयरामसर, बीदासर सहित कई गांवों में भारी बारिश दर्ज की गई है। खेतों में काटकर रखी मूंग-मोठ की फसलें सड़ने लगी हैं। पानी में भीगकर फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, और किसानों के चेहरे पर मायूसी और आंखों में आंसू साफ झलक रहे हैं।
सातलेरा गांव के किसान किशनलाल जाखड़ रुंधे गले से कहते हैं, “राम जी रूठ गया, थाली में घाल के कोस लियो है।” उनका कहना है कि, “भगवान ने आलो काळ नाख़ दियो, फसल निकलने का वक्त आया तो बरसात कर अन्न छीन लियो।” बिग्गा के किसान बनवारी जवरिया मायूसी में कहते हैं, “अब तो राज से ही आस है, राम जी तो रूठ गए।”
लगातार बरसात से खेतों में खड़ी मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार और कपास की फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों के अनुसार, “मोठ-मूंग की फसल तो शत-प्रतिशत खराब हो चुकी है।”
किसानों ने राज्य सरकार से तत्काल सर्वे करवाने और मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि अगर अब सरकार ने मदद नहीं की तो किसान कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। आसमान की ओर देखते हुए किसानों ने प्रार्थना की है, “हे प्रभु! अब तो रहम कर, हमारी मेहनत का फल बार-बार मत छीन।”