सूत्रों की मानें तो, आयोग इस बार पंचायत चुनावों में खर्च की सीमा को 10% तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो पंच, सरपंच और जिला परिषद सदस्य जैसे पदों के उम्मीदवार पहले की अपेक्षा अधिक धनराशि खर्च कर सकेंगे।
सरपंच पद के उम्मीदवार अब 50 हजार की जगह 55 हजार रुपए तक खर्च कर पाएंगे, वहीं जिला परिषद सदस्य की खर्च सीमा 1.65 लाख रुपए तक हो सकती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भी खर्च की सीमा में बढ़ोत्तरी की गई थी और इसे लगभग दोगुना कर दिया गया था। अब छह साल बाद, बढ़ती महंगाई और जनप्रतिनिधियों की ओर से आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर यह कदम उठाया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि, “महंगाई बढ़ी है, तो खर्च भी बढ़ा है। समय-समय पर खर्च सीमा बढ़ाना ज़रूरी है, ताकि उम्मीदवार अनावश्यक धनबल का प्रयोग न करें। सीमा तय रहने से पारदर्शिता बनी रहती है।”
सिर्फ खर्च सीमा ही नहीं, बल्कि जमानत राशि में भी बदलाव की संभावना है। वर्तमान में सरपंच पद के लिए जमानत राशि 500 रुपए है, जबकि ओबीसी, एससी-एसटी और महिला उम्मीदवारों के लिए यह 250 रुपए है। अब इस राशि को दोगुना करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, जिसके तहत सामान्य वर्ग के लिए 1000 रुपए और आरक्षित वर्ग के लिए 500 रुपए जमानत राशि तय की जा सकती है।
चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव खत्म होने के 30 दिन के भीतर अपने खर्च का पूरा हिसाब-किताब जिला निर्वाचन अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। इसमें चुनाव प्रचार, वाहन, रैली, पोस्टर-बैनर, साउंड सिस्टम, चाय-नाश्ता, और सभाओं पर हुए खर्च शामिल होंगे। निर्धारित समय में रिपोर्ट जमा न करने वाले उम्मीदवारों को आयोग अयोग्य भी घोषित कर सकता है।
राजस्थान में पंचायत चुनाव क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं? इस बार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत पंचायत चुनाव कराने की तैयारी चल रही है। इन चुनावों के माध्यम से पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, उप प्रधान, जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख जैसे पदों पर जनप्रतिनिधियों का चयन होगा। प्रत्येक स्तर पर मतदाताओं की सीधी भागीदारी होने के कारण ये चुनाव हर राजनीतिक दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने संकेत दिए हैं कि चुनाव फरवरी 2026 में हो सकते हैं।
पड़ोसी राज्यों में भी इस दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में हाल ही में पंचायत चुनाव के खर्च की सीमा में वृद्धि की गई थी। वहां ग्राम प्रधान अब 1.25 लाख, क्षेत्र पंचायत सदस्य 1 लाख और जिला पंचायत सदस्य 2.5 लाख रुपए तक खर्च कर सकते हैं।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भी प्रत्याशियों के खर्च की सीमा 40 लाख रुपए तय की गई थी, जो 2018 में 28 लाख थी। इस प्रकार, बीते सात वर्षों में विधानसभा स्तर पर खर्च सीमा में 20% से अधिक की वृद्धि हुई है।
ऐसे में, पंचायत चुनावों में खर्च सीमा में संभावित बढ़ोतरी से चुनावी परिदृश्य में क्या बदलाव आते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या इससे उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार में मदद मिलेगी या फिर यह धनबल के प्रदर्शन को बढ़ावा देगा? यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है।