2 दिसंबर को, मानवाधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे, जिसमें छात्रों को उनके मूलभूत मानवाधिकारों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि एक नागरिक के तौर पर उनके क्या अधिकार हैं और वे उनका उपयोग कैसे कर सकते हैं।
अगले दिन, 3 दिसंबर को कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न अधिनियम-2013 पर चर्चा हुई। इस सत्र में विशेष रूप से छात्राओं को उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्हें यह भी समझाया गया कि कार्यस्थल पर उनके क्या विशेषाधिकार हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति में वे कानूनी रूप से किस प्रकार सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य, महावीर नाथ जी ने इस अवसर पर कहा कि युवा पीढ़ी को अपने अधिकारों और कानून की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उन्हें न केवल अपने अधिकारों के बारे में जानना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
सहायक आचार्य निशा सोढा और शुभनन्दिनी ने भी विद्यार्थियों को इन विषयों पर जागरूक रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के ज्ञान से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों और कर्मचारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। व्याख्यान माला का समापन इस आशा के साथ हुआ कि विद्यार्थी अपने अधिकारों के प्रति सजग रहेंगे और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देंगे।