श्रीडूंगरगढ़, 9 नवंबर 2025: कस्बे में बीती रात एक मार्मिक घटना घटी। 75 वर्षीय चैनरूप झाबक, जो उम्र के साथ भूलने की बीमारी से जूझ रहे हैं, शनिवार की शाम लगभग 7 बजे अपने घर से निकले और फिर राह भटक गए। जब वे रात 9:30 बजे तक घर नहीं लौटे, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई और उन्होंने उनकी तलाश शुरू कर दी।
ऐसे कठिन समय में, श्रीडूंगरगढ़ ONE समाचार पोर्टल ने परिजनों के आग्रह पर तत्काल बुजुर्ग के लापता होने की खबर प्रकाशित की। इस खबर ने एक संवेदनशील नागरिक, रवि पुत्र शिव नाई का ध्यान आकर्षित किया। श्रीडूंगरगढ़ निवासी रवि ने पोर्टल पर प्रकाशित खबर को देखा और अपनी सजगता दिखाते हुए हाइवे पर करणी हैरिटेज के पास एक बुजुर्ग को देखा। तस्वीर से मिलान करने पर उन्हें लगा कि ये वही हैं जिनकी खबर उन्होंने पढ़ी थी।
रवि ने तुरंत श्रीडूंगरगढ़ ONE में दिए गए अशोक झाबक के नंबर पर फोन किया और अपनी आशंका से अवगत कराया। अशोक झाबक बिना देर किए मौके पर पहुंचे और तलाश शुरू कर दी। उसी दिशा में खड़े एक ट्रक ड्राइवर ने भी बताया कि उन्होंने बुजुर्ग को उसी ओर जाते हुए देखा था।
आशा और आशंका के बीच अशोक झाबक आगे बढ़े, और गांव सातलेरा से लगभग 300 मीटर पहले उन्हें सड़क किनारे चैनरूप जी मिलते दिखाई दिए। दुर्भाग्यवश, कहीं गिरने के कारण उन्हें चोट भी आई थी। अशोक तुरंत उन्हें उपजिला अस्पताल ले गए, जहां उनका उपचार कराया गया। उपचार के बाद, वे चैनरूप जी को सकुशल उनके घर तक ले आए।
इस घटना के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। उन्होंने श्रीडूंगरगढ़ ONE की तत्परता और रवि नाई की सजगता के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे कस्बे के लिए एक सीख है कि कैसे एक छोटी सी कोशिश और सजगता किसी के जीवन में खुशियां ला सकती है। स्मृति के गलियारों में भटकते चैनरूप जी, अपनों के स्नेह और समाज की सतर्कता से एक बार फिर अपने घर लौट आए।