सुबह 10 बजे, पंचायत भवन में ग्रामीण और डूडी के समर्थक बड़ी संख्या में पहुंचे। हवा में शोक और सम्मान का एक मिलाजुला भाव था। सभा की शुरुआत दो मिनट के मौन से हुई, जिसमें सभी ने दिवंगत आत्मा को शांति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद, उपस्थित लोगों ने डूडी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की, यह एक प्रतीकात्मक इशारा था जो उनके प्रति उनके प्रेम और सम्मान को दर्शाता था।
सभा में, रामलाल जाखड़, जिज्ञासु सिद्ध और मघाराम सिंवर जैसे वक्ताओं ने डूडी के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने डूडी के साथ बिताए अपने समय की कहानियाँ साझा कीं, जिससे उनकी यादें ताज़ा हो गईं। ओमप्रकाश ने बताया कि वक्ताओं ने डूडी को एक सर्वमान्य नेता बताया, जो हमेशा सभी को साथ लेकर चलते थे। उनकी बातों में डूडी के प्रति गहरा सम्मान और स्नेह झलकता था।
युवाओं ने नम आंखों से डूडी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। यह एक भावनात्मक क्षण था, जो दिखाता था कि डूडी ने अपने जीवन और कार्यों से कितने लोगों को प्रेरित किया था।
सभा में गणेशाराम गोदारा, गणेशाराम पोटलिया, भगुनाथ हुड्डा, भंवरलाल जाखड़, अमरचंद नाथ सिद्ध, बनाराम डोगीवाल और भागूराम सिंवर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति ने डूडी के प्रति क्षेत्र के लोगों के गहरे सम्मान और स्नेह को दर्शाया।
यह श्रद्धांजलि सभा न केवल डूडी के जीवन का उत्सव थी, बल्कि यह उनके मूल्यों और आदर्शों को आगे बढ़ाने का एक संकल्प भी था। यह एक ऐसा अवसर था जब समुदाय एक साथ आया और एक ऐसे व्यक्ति को याद किया जिसने उनके जीवन को किसी न किसी तरह से छुआ था।