उपासिका पुष्पा नौलखा और अंकिता मालू ने अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुष्पा नौलखा ने आचार्य भिक्षु को 18वीं शताब्दी का एक अद्वितीय धर्म क्रांतिकारी बताया, जिन्होंने सत्य और चारित्रिक मूल्यों के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि जीवन में कई रास्ते होते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम सही मार्ग का चुनाव करें। उन्होंने द्रव्य और भाव पूजा, गुणों की उपासना और शुद्ध साधन के माध्यम से शुद्ध लक्ष्य को प्राप्त करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
अंकिता मालू ने तेरापंथ के सिद्धांतों और उनकी धर्म की कसौटियों पर खरे उतरने की बात कही। उन्होंने तेरापंथ की मर्यादा, संगठन और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चली, जिसमें अणुव्रत समिति के अध्यक्ष सुमन बाफना, मंत्री राकेश संचेती, जगत पटावरी, पुष्पा पटावरी, कमल सेठिया, कंचन पटावरी, कल्पना सेठिया और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक पटावरी और बड़ी संख्या में श्रावक समाज भी उपस्थित थे। आगंतुक बहनों का सम्मान दुपट्टा ओढ़ाकर किया गया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन राकेश संचेती ने किया। इस कार्यशाला ने उपस्थित लोगों को तेरापंथ के मार्ग और आचार्य भिक्षु की शिक्षाओं को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया, जिससे सभी ने एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का अनुभव किया। यह आयोजन तेरापंथ के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अनुभव रहा।