बीकानेर अंचल में त्याग और सेवा की भावना जीवंत है। रविवार को एसपी मेडिकल कॉलेज में एक भावुक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ महर्षि दधीचि की जयंती पर जिले के उन परिवारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने देहदान का संकल्प लेकर समाज के लिए एक मिसाल कायम की है।
कार्यक्रम में शरीर रचना विभाग के डॉ. राकेश मणि ने देहदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक ऐसा कार्य है जो मृत्यु के बाद भी जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से देहदान के लिए आगे आने और अन्य परिवारों को भी प्रेरित करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने महर्षि दधीचि के उस महान त्याग का स्मरण किया, जब उन्होंने मानव कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान कर दिया था। इस अवसर पर, बिग्गाबास रामसरा के दिवंगत कन्हैयालाल सियाग के पुत्र सीताराम सियाग सहित जिले के पाँच देहदानियों के परिवारों का सम्मान किया गया।
उधर, श्रीडूंगरगढ़ में भी महर्षि दधीचि की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। दधिमथी माता मंदिर में विशेष पूजन का आयोजन किया गया। सनातन परंपरा में महर्षि दधीचि को त्याग, शौर्य और परोपकार के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
31 अगस्त 2025 को योगेश सेवग ने बताया कि पंडित आदित्य आसोपा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महर्षि दधीचि और माँ दधिमथी का पूजन संपन्न करवाया। पूजन के बाद आरती की गई और प्रसाद का भोग लगाकर कन्या भोज का आयोजन किया गया। पुजारी सीताराम आसोपा ने महर्षि दधीचि के आदर्शों की व्याख्या करते हुए समाज में लोककल्याण के लिए श्रेष्ठ नागरिकों को आगे आने की प्रेरणा दी। इस दौरान मोहल्ले के कई लोग पूजन में शामिल हुए।
ये दोनों कार्यक्रम हमें उस महान विरासत की याद दिलाते हैं, जो त्याग, सेवा और परोपकार के मूल्यों पर आधारित है। देहदान और इस तरह के आयोजन समाज को एकजुट करने और मानव कल्याण के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।