किसानों का जीवन, धूप-छाँव का एक अटूट सिलसिला है। वे धरती को सींचते हैं, अन्न उपजाते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन कई बार, अप्रत्याशित आपदाएँ उनकी राह में रोड़ा बनकर खड़ी हो जाती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ श्रीडूंगरगढ़ के कितासर बीदावतान गाँव में, जहाँ एक किसान परिवार के सपनों पर अचानक आग ने धावा बोल दिया।
गाँव की रोही में मनोज कुमार पुत्र सूरताराम मेघवाल की ढाणी में शुक्रवार की दोपहर, घड़ी में ठीक 12 बजे, अज्ञात कारणों से आग लग गई। आग की लपटें देखते ही देखते आसमान छूने लगीं और परिवार की उम्मीदें राख में बदलने लगीं।
मनोज कुमार ने बताया कि उसका बड़ा भाई जल्द ही दुबई जाने वाला था, जिसके लिए उसने बड़ी मुश्किल से 50 हजार रुपये जुटाए थे और उन्हें ढाणी में ही रखा था। वह अपने परिवार के साथ पास ही स्थित अपने भाई की ढाणी में मूंगफली के काम में मदद कर रहा था। अचानक, गाय की छान से आग की लपटें उठने लगीं। जब तक वे मौके पर पहुँचते, आग ने उनके रहने के लिए बने दो झोंपड़ों को अपनी चपेट में ले लिया था।
आस-पास के खेतों में काम कर रहे किसान भी दौड़कर आए और पानी से आग बुझाने की कोशिश करने लगे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 50 हजार रुपये नकद, कुछ सोने-चांदी के गहने, 5 क्विंटल गेहूं, 4 क्विंटल बाजरा, 1 क्विंटल ग्वार, ओढ़ने-बिछाने के कपड़े और पहनने के कपड़े, सब कुछ जलकर राख हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही खेत के पड़ोसियों ने पटवारी को खबर दी। पटवारी तुरंत मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। पीड़ित मनोज कुमार ने श्रीडूंगरगढ़ थाने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई है।
इस मुश्किल घड़ी में गाँव के लोग मनोज कुमार और उसके परिवार के साथ खड़े हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद करने की गुहार लगाई है, ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि किसानों का जीवन कितना अनिश्चितताओं से भरा होता है और उन्हें हर कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।