श्रीडूंगरगढ़, 25 सितंबर 2025। जीवन की डोर कितनी नाजुक होती है, यह एक छोटी सी चूक से भी पता चल जाता है। रसोई में जलती आग, जीवनदायिनी भी है और लापरवाही से प्राणघातक भी।
गुरुवार की सुबह श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के एक मंदिर में ऐसा ही कुछ हुआ। मंदिर की रसोई में दूध गरम करने के बाद एक छोटी सी असावधानी बरती गई। गैस चूल्हे का बटन खुला रह गया।
कुछ समय बाद, नेमसिंह नामक एक कर्मचारी रसोई में दाखिल हुआ। आड़सर बास के निवासी, 45 वर्षीय नेमसिंह पुत्र धन्नेसिंह, शायद इस बात से अनजान थे कि रसोई में क्या छिपा है। उन्होंने जैसे ही गैस जलाने के लिए लाइटर का इस्तेमाल किया, पहले से रिस रही गैस ने आग पकड़ ली।
एक भयंकर लपट उठी और नेमसिंह उसकी चपेट में आ गए। वे बुरी तरह झुलस गए।
तत्काल ही उन्हें श्रीडूंगरगढ़ के उपजिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें बीकानेर रेफर कर दिया।
यह घटना एक गंभीर सबक है। छोटी सी भूल भी कितनी बड़ी विपत्ति ला सकती है। रसोई में काम करते समय सावधानी बरतना कितना ज़रूरी है, यह इस घटना ने एक बार फिर याद दिला दिया। उम्मीद है नेमसिंह जल्द स्वस्थ होकर लौटेंगे।