हाथों में लहराते लाल-सफेद ध्वज, पैरों में घुंघरुओं की मधुर झंकार और आसमान में उड़ती गुलाल, इस अद्भुत दृश्य को और भी दिव्य बना रहे थे। श्रद्धालु नाचते-गाते, बाबा के गुणों का बखान करते हुए आगे बढ़ रहे थे, मानो पूरा वातावरण ही भक्ति के रंग में रंग गया हो।
यात्रा के आरंभ से पूर्व, बाबा हरिरामजी महाराज के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी श्रवणदास ने श्रद्धालुओं को ध्वजा सौंपकर, तिलक लगाकर मंगलकामनाएं दीं। उस समय पूरा गांव भक्ति रस में डूबा हुआ प्रतीत हो रहा था। महिलाओं ने बाबा की छावली का भावपूर्ण गायन किया, जिससे वातावरण और भी भक्तिमय हो गया।
संघ के व्यवस्थापकों, सांवरमल और नेमीचंद सारस्वत ने जानकारी दी कि इस पदयात्रा में लगभग दो सौ से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं। यह संघ भादवा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को झोरड़ा धाम पहुंचकर बाबा के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करेगा। संघ के संचालक ओंकारमल गोदारा ने बताया कि खारड़ा से झोरड़ा धाम तक पैदल यात्रा की यह परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
उधर, बीकानेर शहर भी भक्ति के रंग में रंगा नज़र आया। यहां से भी सबसे बड़ा रामदेवरा पैदल यात्री संघ, “मस्त मस्ताना मंडल”, शनिवार को भव्य जुलूस के साथ ओझा भवन से रवाना हुआ। संघ के सदस्य अनिल कुमार ओझा ने बताया कि विधिवत पूजा-अर्चना के बाद, भक्तगण गाजे-बाजे के साथ अपनी यात्रा पर निकले, जो रामदेवरा की ओर अग्रसर है।
इन पदयात्राओं में उमड़ा जनसैलाब आस्था और श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है। यह दृश्य न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामुदायिक एकता और सामाजिक सद्भाव का भी प्रतीक है। पदयात्रियों का उत्साह और भक्तिभाव देखकर ऐसा लगता है, मानो राजस्थान की धरती पर एक दिव्य ऊर्जा का संचार हो रहा है।