यह कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब मूंगफली की फसल पकने वाली है, और इसे लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र के किसान और नेता इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों ने शुक्रवार और शनिवार को हुई कार्रवाई को लगातार जारी रखने की बात कही थी। लेकिन सोमवार को हालात बदल गए, जब किसान स्वयं श्रीडूंगरगढ़ में एकत्रित हो गए।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के आह्वान पर किसान और युवा बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भारतीय किसान संघ टिकैत के जिलाध्यक्ष पूनमचंद नैण के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में युवा नेता विवेक माचरा भी शामिल हुए।
पूनमचंद नैण ने इस कार्रवाई को किसानों पर दमनात्मक नीति बताते हुए तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल के बाद ही बिल भरने की सुविधा मिलनी चाहिए।
डॉ. माचरा ने कहा कि किसान हमेशा फसल लेने के बाद ही बिल भरते आए हैं, लेकिन इस बार विभाग किसान विरोधी रुख अपना रहा है, जिसका वे पुरजोर विरोध करेंगे।
किसानों की मांग है कि उन्हें फसल पकने और मंडी में बिकने तक का समय दिया जाए, ताकि वे बिल भर सकें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ट्रांसफार्मर उतारने की कार्रवाई जारी रखता है, तो वे निगम दलों का पुरजोर विरोध करेंगे।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर किसानों और सरकार के बीच के जटिल रिश्तों को उजागर किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे का समाधान कैसे निकलता है।