मंगलवार को अष्टमी के दिन, दुर्गा पूजा महोत्सव में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। आरती के समय पूरा पंडाल “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। भक्तगण माँ के प्रेम में डूबे, श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम का अनुभव कर रहे थे।
महाआरती के बाद, बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक बंगाली दुर्गा नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य में स्थानीय महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जो एकता और सद्भाव का प्रतीक था। इसके बाद, सजीव झांकियों के माध्यम से माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का मनमोहक चित्रण किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से झांकियों का आनंद लिया और माँ के जयकारे लगाए।
शाम को डांडिया नृत्य का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भाग लिया। पूरे पंडाल में उत्साह और उमंग का माहौल था, मानो हर कोई माँ दुर्गा के आगमन की खुशी मना रहा हो।
इससे पहले, सोमवार को माता की विशेष आरती के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन था, बल्कि इसने लोगों को एक साथ आने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान किया।
बुधवार को भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने माता का प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर, आयोजकों ने सभी भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में आकर माता का आशीर्वाद लेने की अपील की।
महोत्सव का समापन गुरुवार को सिंदूर पूजन और मूर्ति विसर्जन के साथ होगा। यह दिन श्रद्धा और विदाई की भावनाओं से भरा होगा, क्योंकि भक्तगण माँ दुर्गा को अगले साल फिर से आने का वादा करते हुए विदा करेंगे।