कार्यक्रम की शुरुआत एक प्रवचन के साथ हुई, जिसके बाद सामूहिक ध्यान का अभ्यास कराया गया। श्वास प्रेक्षा के माध्यम से साधकों को ध्यान की गहराइयों से परिचित कराया गया। साध्वी संगीतश्री ने भगवान महावीर के पूर्व जन्मों की कथाओं को सरल शब्दों में सुनाते हुए ध्यान के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि ध्यान, आत्मशुद्धि का मार्ग है और इससे मन को असीम शांति प्राप्त होती है।
साध्वी परमप्रभा ने ध्यान दिवस से जुड़ी कई सच्ची घटनाओं का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को आत्म-अनुशासन और साधना के पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आंतरिक शांति की खोज ही जीवन का सार है और यह ध्यान के माध्यम से ही संभव है।
कार्यक्रम के समापन पर साध्वी संगीतश्री ने आगामी संवत्सरी महापर्व के बारे में बताते हुए सभी से अधिक से अधिक उपवास और पौषध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संवत्सरी क्षमापर्व, आत्मशुद्धि का एक महान अवसर है और हर व्यक्ति को इसका लाभ उठाना चाहिए। यह पर्व हमें अपने भीतर झाँकने और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने का अवसर देता है, जिससे हम एक बेहतर इंसान बन सकें।